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गुरु नानक जयंती: देशभर में कल मनाया गया 550वां प्रकाश पर्व


डिजिटल डेस्क। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी के जन्मदिन को देशभर में प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। प्रकाश पर्व यानी मन की बुराइयों को दूर कर उसे सत्य, ईमानदारी और सेवाभाव से प्रकाशित करना। कहते हैं सतगुरु नानक जी का आगमन अंधकार में प्रकाश के समान है। जो एक ईश्वरीय शक्ति का संदेश देने आए थे। 

हर साल की तरह इस बार भी कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु नानक देव जयंती मनाई जाएगी। इस साल गुरु नानक जयंती 12 नवंबर मंगलवार को था। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी खास बातें...

आस्था
प्रकाश पर्व का अर्थ है यह बाहरी रोशनी नहीं है, बल्कि अंदर के अंधकार को दूर करने के संकल्प का दिन है। प्रकाश पर्व के दिन सुबह 4-5 बजे से ही सिख समुदाय के लोग वाहे गुरु, वाहे गुरु जपते हुए सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकालते हैं। ये फेरी गुरुद्वारे से शुरु होकर आस-पास की जगहों पर घूमकर गुरुद्वारे तक वापस जाती है। इसके बाद सभी लोग ग्रंथ साहिब सुनने के लिए जाते हैं। गुरु पर्व के दिन सिख धर्म के लोग अपनी श्रृद्धा के अनुसार सेवा करते हैं और गुरु नानक जी के उपदेशों यानी गुरुवाणी का पाठ करते हैं। गुरुद्वारे में शबद-कीर्तन करते हैं, रुमाला चढ़ाते हैं। 

गुरुद्वारे में कोई भी त्योहार बिना लंगर के संपन्न नहीं होता है। शाम के वक्त लोगों को लंगर खिलाते हैं। ये लंगर हर किसी को आस्था के साथ खिलाया जाता है। गुरुपर्व के दिन खास खाना बनता है और सभी आने वाले भक्तों को खिलाया जाता है। लंगर का भोजन गुरुद्वारे के रसोईघर में आस्था और सेवा करने की भावना रखने वाले लोगों द्वारा ही बनाया जाता है। इस दिन कई गुरुद्वारों में रात के समय गुरुबानी का पाठ होता है।

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