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भारत-चीन की तुलना सही नहीं, अर्थव्यवस्था में है बड़ा अंतर: रघुराम राजन 

April 13th, 2018 20:25 IST
भारत-चीन की तुलना सही नहीं, अर्थव्यवस्था में है बड़ा अंतर: रघुराम राजन 

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत और चीन की अर्थव्यवस्था के बीच के अंतर को स्पष्ठ करते हुए दोनों देशों बीच तुलना करने को अनुचित करार दिया है। राजन ने भारत के ढांचागत क्षेत्र में सुधार की वकालत करते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच तुलना करना अनुचित है क्योंकि चीन के मुकाबले भारत की अर्थव्यवस्था काफी छोटी है। भारत के मुकाबले कम्युनिस्ट शासन वाले चीन की अर्तव्यवस्था 5 गुना अधिक बड़ी है। पूर्व गवर्नर ने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि कई मौकों पर भारत और चीन के बीच तुलना की जाती है। दोनों ही देशों के काफी हद तक अलग होने के कारण यह तुलना काफी हद तक अनुचित है।'

चीन से तुलना करने पर भारत का विकास पड़ जाता है फीका 
हार्वर्ड केनेडी स्कूल में 2018 के अल्बर्ट एच गोर्डान व्याख्यान देते हुए राजन ने यह बात कही। शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में राजन वित्त के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मापदंड से, चीन की तुलना को छोड़कर, भारत का हालिया विकास एक बहुत ही प्रभावशाली कहानी बयान करता है। भारत को पिछले 25 सालों में सात प्रतिशत जीडीपी विकास दर का मुकाबला करना है। उन्होंने कहा कि चीन के मुकाबले तुलना करने पर भारत का विकास फीका पड़ जाता है। चीन की अर्थवयवस्था का आकार भारत के मुकाबले 5 गुना अधिक बड़ा है। दोनों देशों के बीच प्रति व्यक्ति आय भी इसी तरह की है, क्योंकि दोनों देशों की जनसंख्या एक दुसरे के करीब आ रही है। 

भारत में ढांचागत परियोजनाओं को तैयार करना कठिन 
राजन ने कहा कि मुझे विश्वास है कि विकास के लिए सबसे मजबूत प्रणाली एक सरकारी प्रणाली है, ना कि एक तानाशाही व्यवस्था है। पिछले 25 सालों में भारत की आर्थिक वृद्धि 7 प्रतिशत के दायरे में रही है। भारत में ढांचागत परियोजनाओं को तैयार करना काफी कठिन काम है। चीन के मुकाबले भारत ने ढांचागत सुविधा और निर्माण कार्य को छोड़कर सारे कार्य किए हैं। चीन के विकास और विनिर्माण क्षेत्र की प्रगति में बेहतर ढांचागत सुविधाओं का बहुत बड़ा योगदान है। भारत के मुकाबले चीन में लाजिस्टिक सुविधाएं, बंदरगाह तक पहुंचने की विधा और सड़कें बहुत अच्छी हैं। राजन ने कहा कि भारत में ढांचागत परियोजनाओं को तैयार करने का काम काफी कठिन है। 

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