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धीरे-धीरे रियल एस्टेट मार्केट में लौट रहे इंडियन होमबॉयर्स, क्या हैं वजह?

धीरे-धीरे रियल एस्टेट मार्केट में लौट रहे इंडियन होमबॉयर्स, क्या हैं वजह?

हाईलाइट

  • भारतीय होमबॉयर्स धीरे-धीरे रियल एस्टेट मार्केट में लौट रहे हैं
  • इसका कारण प्रॉपर्टी की अनुकूल कीमतों, जीएसटी में कटौती और कम ब्याज दरें हैं
  • कम संख्या में लॉन्च भी बाजार की स्थिति को सामान्य बनाने में मदद कर रहे हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय होमबॉयर्स धीरे-धीरे रियल एस्टेट मार्केट में लौट रहे हैं। इसका कारण प्रॉपर्टी की अनुकूल कीमतों, माल और सेवा कर (जीएसटी) में कटौती और कम ब्याज दरें हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि बिक्री की गति में लगातार सुधार के अलावा, अपेक्षाकृत कम संख्या में लॉन्च भी बाजार की स्थिति को सामान्य बनाने में मदद कर रहे हैं।

रियल एस्टेट सर्विस कंपनी अनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के अनुसार, शीर्ष सात शहरों में अनसोल्ड रेसिडेंशियल अपार्टमेंट की इंवेंटरी मार्च क्वाटर के अंत में 30 महीने तक गिर गई। 2017 में इसी अवधि में ये 50 महीनों तक गिरी हुई थी। यह मौजूदा अनसोल्ड स्टॉक को बेचने में लगने वाले महीनों की संख्या को दर्शाता है। लगभग 18 महीने के स्तर को अच्छा माना जाता है। इन बाजारों में अनसोल्ड हाउसिंग स्टॉक पिछले दो वर्षों में लगभग 16% घटकर 665,000 यूनिट हो गया है, हालांकि यहा अभी भी 2013 के 496,000 यूनिट के सबसे निचले स्तर से काफी दूर है।

अनारोक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के अध्यक्ष अनुज पुरी ने कहा, 'शहरों में औसत संपत्ति की कीमतें काफी हद तक स्टेबल हैं और पिछले दो वर्षों में 2% से कम की बढ़ोतरी देखी गई है। 2017 की पहली तिमाही में जिस प्रॉपर्टी की कीमत 5,480 रुपये प्रति वर्ग फुट थी उसकी कीमत 2019 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में 5,570 रुपये प्रति वर्ग फुट है।' उन्होंने कहा, केंद्र में एक स्थिर सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह खरीदार के विश्वास को बढ़ावा दे और आने वाली तिमाहियों में आवास बिक्री की विलोसिटी को बढ़ाए।

मार्च तिमाही में शीर्ष सात शहरों में आवास की बिक्री दो साल पहले की समान अवधि के 46,000 की तुलना में 71% बढ़कर 78,520 यूनिट हो गई। जबकि शीर्ष सात शहरों में पिछले दो वर्षों में अनसोल्ड हाउसिंग स्टॉक में 16% की क्यूमूलेटिव गिरावट देखी गई, बेंगलुरु में सबसे तेज गिरावट देखी गई। हाउसिंग इन्वेंट्री दो साल पहले की 118,700 यूनिट की तुलना में मार्च तिमाही में 44% की गिरावट के साथ 66,820 यूनिट हो गई है।

भारत के सबसे बड़ी रियल्टी डेवलपर डीएलएफ की कमाई में यह बढ़ोतरी देखी गई। डीएलएफ ने वित्त वर्ष 19 में एक साल पहले 1,000 करोड़ रुपये के मुकाबले 2,435 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की। डीएलएफ के सीईओ राजीव तलवार ने कहा, 'निश्चित रूप से कम होम लोन की दरों और अर्थव्यवस्था में स्थिर वृद्धि से होम बायर्स का भरोसा बढ़ा है।' उन्होंने कहा, जोखिमों से बचने के लिए, होम वायर अब लगभग पूर्ण या रेडी-टू-मूव-इन अपार्टमेंट में ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर ने दो साल की अवधि के दौरान अनसोल्ड स्टॉक में 18% की महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की, जिसमें मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) जैसे हैवीवेट बाजारों को पीछे छोड़ दिया। दो साल की अवधि में मुंबई अपनी इन्वेंट्री का मात्र 4% स्टॉक ही क्लीयर कर पाया है। संक्षेप में, NCR ने दो वर्षों में अपनी अनसोल्ड हाउसिंग इन्वेंट्री को 90 महीने से 45 महीने पर ला दिया है।

अनारॉक के हालिया कंज्यूमर सेंटिमेंट सर्वे ने पुष्टि की कि 60% से अधिक संभावित खरीदारों ने 2019 में प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाई है। अनुकूल संपत्ति की कीमतों के अलावा जीएसटी दर में कटौती ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की सुविधा के बिना, सस्ते घरों पर जीएसटी दरों को 8% से घटाकर 1% कर दिया। वहीं अन्य परियोजनाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया। दिसंबर के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक ने बेंचमार्क दर को 50 बेसिस पॉइंट घटाकर 6% कर दिया है, जिससे उम्मीद है कि हाउसिंग लोन की ब्याज दरें घट जाएंगी।

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