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जानें चंद्रमा का ज्योतिष स्वभाव एवं कारक क्या है ?

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 05th, 2018 13:55 IST

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जानें चंद्रमा का ज्योतिष स्वभाव एवं कारक क्या है ?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष विज्ञान में चंद्र का स्थान दूसरा है। पंचांग भी चंद्र पर आधारित होता है। चंद्र के कारण ही शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष होते हैं। चंद्रमा के कारण ही समुद्र में ज्वारभाटा उत्पन्न होता है। वैज्ञानिक कहते हैं कि हमारे शरीर में 65 प्रतिशत जल की स्थिति है। तो सोचें, क्या हमारे शरीर में ज्वारभाटा उत्पन्न नहीं होता है ? हमारा मन कृष्ण पक्ष के साथ घटता है और शुक्ल पक्ष के साथ बढ़ता है। स्त्रियों पर चंद्र का प्रभाव ज्यादा माना गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार :-
चंद्रमा कोई ग्रह नहीं यह पृथ्वी का उपग्रह माना जाता है। पृथ्वी की तुलना में यह एक चौथाई अंश के बराबर है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी से इसकी दूरी 406860 किलोमीटर मानी गई है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा 27 दिन में पूर्ण करता है। इतने ही समय में यह अपनी धुरी पर एक चक्कर लगा लेता है। 15 दिनों तक इसकी कलाएं क्षीण होती हैं तो 15 दिन यह बढ़ता रहता है। चंद्रमा सूर्य से प्रकाश लेकर पृथ्वी को प्रकाशित करता है।

पुराणों के अनुसार :- 
देव और दानवों द्वारा किए गए सागर मंथन से जो 14 रत्न निकले थे उनमें से एक चंद्रमा भी थे। जिन्हें भगवान शंकर ने अपने सिरोधार्य कर लिया था जिस कारण उन्हें चन्द्रभूषण कहा जाता है।

चंद्र देव हिंदू धर्म के अनंत कोटि देवों मे से एक हैं। चंद्रमा को जल तत्व का देव कहा जाता है। कुण्डली में चंद्रमा की महादशा दस वर्ष की होती है। चंद्रमा के अधिदेव महादेव हैं। श्रीमद् भागवत के अनुसार चंद्रदेव महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र हैं। इनको सर्वमय कहा गया है। ये सोलह कलाओं से युक्त हैं। इन्हें अन्नमय, मनोमय, अमृतमय पुरुष स्वरूप भगवान कहा जाता है।

प्रजापितामह ब्रह्मा ने चंद्र देवता को बीज, औषधि, जल तथा ब्राह्मणों का राजा बनाया है। चंद्र देव का विवाह राजा दक्ष की सत्ताईस पुत्रियों​ से हुआ था। ये कन्याएं सत्ताईस नक्षत्रों के रूप में भी जानी जाती हैं, जैसे अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी आदि। चंद्रदेव की पत्नी रोहिणी से उनको एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम बुध है। चंद्र ग्रह ही सभी देव, पितृ, यक्ष, मनुष्य, भूत, पशु-पक्षी और वृक्ष आदि के प्राणों का संचार करते हैं।

अशुभ :- 
चंद्रमा के अशुभ होने से दूध देने वाला जानवर मर जाता है। यदि घोड़ा पाल रखा हो तो उसकी मृत्यु भी तय है, किंतु सामान्य रूप से अब लोग ये पशु नहीं पालते हैं। माता का रोगी होना या घर के जल के स्रोतों का सूख जाना भी चंद्र के अशुभ होने का सूचक होता है। अनुभव करने की क्षमता क्षीण हो जाती है। राहु, केतु या शनि के साथ होने से तथा उनकी दृष्टि चंद्र पर पड़ने से चंद्र और अशुभ हो जाता है। मानसिक रोगों का कारण भी चंद्रमा को माना गया है।

शुभ :- 
चंद्रमा के शुभ होने पर व्यक्ति को धनवान और दयालु बनाता है। सुख और शांति देता है। भूमि और भवन के स्वामी चंद्रमा से चतुर्थ में शुभ ग्रह होने पर घर संबंधी शुभ फल प्राप्त होते हैं।

उपाय :-
अशुभ चंद्रमा होने पर प्रतिदिन माता के चरण स्पर्श करें। शिव की भक्ति करें। सोमवार के दिन का व्रत करें। पानी या दूध को शुद्ध पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर यानि बबूल के वृक्ष की जड़ में डाल दें। चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बेल, दही और मोती का दान करें।

मकान :- 
चंद्र भवन है तो मकान से 24 कदम की दूरी पर या ठीक सामने कुआं, हैंडपंप, तालाब या बहता हुआ पानी अवश्य होगा। दूध वाले वृक्ष होंगे। घर में शांति होगी।

चन्द्र शांति मन्त्र :-
।।ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः।। 

इनके देवता:- शिव  
इनका गोत्र:- अत्रि 
इनकी दिशा:- वायव
इनका दिवस:- सोमवार
इनका वस्त्र:- धोती 
इनका पशु:- घोड़ा
शरीर में इनका अंग:- दिल, बायां भाग
चन्द्र देव से सम्बंधित व्यापार:- कुम्हार, झींवर
इनकी वस्तु:- चांदी, मोती, दूध 
इनका स्वभाव:- शीतल और शांत पूर्णिमा पर क्रोधित
इनका वर्ण और जाति:- श्वेत, ब्राह्मण
इनकी विशेषता:- दयालु, हमदर्द
इनका भ्रमण काल:- एक राशि में सवा दो दिन।
इनका नक्षत्र:- रोहिणी, हस्त, श्रवण
इनके गुण:- माता, जायदाद, शांति
इनका वृक्ष:- पोस्त का हरा पौधा, जिसमें दूध हो।
इनकी शक्ति:- सुख शांति का मालिक, माता का प्यारा, पूर्वजों का सेवक।
इनका वाहन:- हिरण, श्वेत रंग के दस घोड़ों से चलने वाला हीरे जड़ित तीन पहियों वाला रथ है।
इनकी राशि:- सभी नक्षत्रों और कर्क राशि के स्वामी

चंद्रमा के मित्र:- सूर्य,बुध हैं। 
चंद्रमा के शत्रु:- राहु और केतु हैं। 
चंद्रमा के सम ग्रह:- मंगल, गुरु, शुक्र और शनि हैं। 
राहु के साथ होने से चंद्रग्रहण होता है।

अन्य नाम
सोम, रजनीपति, रजनीश, रजनीकर,रजनीकांत,शशि, कला, निधि, इंदू, शशांक, शीतांशु , मृगांक, सुधाकर,राकेश और मयंक आदि हैं।

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