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सावन के महीने में करें ये सरल उपाय, समस्याएं होंगी खत्म मिलेगी शिव की कृपा

सावन के महीने में करें ये सरल उपाय, समस्याएं होंगी खत्म मिलेगी शिव की कृपा

डिजिटल डेस्क। सावन माह, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस माह का खासा महत्व है और भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना गया है। इस माह में शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। वहीं हर सोमवार को शिवालयों, मंदिरों और अपने घर पर भगवान शिव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस माह भगवान शिव की उपासना करने वालों की मनोकामनांए पूरी होती हैं और समस्याएं खत्म होती हैं। कई ऐसे सरल कार्य और उपाय हैं, जिनसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है, कौन से हैं वे उपाय आइए जानते हैं...

समस्याएं और उपाय
सावन में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से 'ऊं नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इस एक उपाय से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
अगर घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करने के साथ ही गुग्गुल धूप जलाएं।
सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।
सावन माह में गरीबों को भोजन कराने से आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और साथ ही पितरों को भी शांति मिलती है।
सावन में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निपट कर मंदिर जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करने के साथ ही काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में 'ऊं नम: शिवाय' मंत्र का जाप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।
सावन में किसी नदी या तालाब पर जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं और साथ ही साथ मन में भगवान शिव का ध्यान करते रहें। यह धन प्राप्ति का सबसे आसान उपाय है। 
आमदनी बढ़ाने के लिए सावन के महीने में किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें और इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
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प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वे बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद विनय पूर्वक उठा लें और उसे घर के पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन पूजा करें।

संतान प्राप्ति के लिए सावन में किसी भी दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें। इसके बाद गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं और प्रत्येक शिवलिंग का शिव स्त्रोत से 11 बार जलाभिषेक करें। इस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें। 

सावन में किसी भी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करने से बीमारियां दूर होती हैं। अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी भी धातु का उपयोग किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक सोमवार को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें।

विवाह में आ रही अड़चन दूर करने के लिए सावन में रोज शिवलिंग पर केसर मिला दूध चढ़ाएं। इससे विवाह के योग जल्दी बनते हैं। 

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