2014 के स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने खुद तोड़ा था 'प्रधानमंत्री' का सुरक्षा प्रोटोकॉल, 'मोदी स्टोरी' ने जारी की वीडियो

2014 के स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने खुद तोड़ा था प्रधानमंत्री का सुरक्षा प्रोटोकॉल, मोदी स्टोरी ने जारी की वीडियो
पीएम मोदी ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री को मिलने वाली सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह से तोड़ दिया था। एक पुराने वीडियो में भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर ने इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि कैसे पीएम मोदी ने बुलेटप्रूफ शीशे को हटवाकर सीधे जनता से बात करने का फैसला लिया।

नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। पीएम मोदी ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री को मिलने वाली सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह से तोड़ दिया था। एक पुराने वीडियो में भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर ने इस घटना का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि कैसे पीएम मोदी ने बुलेटप्रूफ शीशे को हटवाकर सीधे जनता से बात करने का फैसला लिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मोदी स्टोरी की ओर से शेयर किए गए वीडियो में इस पूरे किस्से को 'एक निडर नेता का जनता को प्राथमिकता देने का उदाहरण' बताया गया है।

मोदी स्टोरी की ओर से शेयर किए गए वीडियो में आरके माथुर बताते हैं कि 2014 में यह पीएम मोदी का पहला 15 अगस्त था। संबोधन से पहले वह और इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर प्रधानमंत्री को ब्रीफिंग देने गए थे।

पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री के सामने सुरक्षा कारणों से बुलेटप्रूफ ग्लास का बैरियर लगा रहता है।

आरके माथुर ने कहा, "हमारी तरफ से यह सिक्योरिटी का प्रश्न था। आप जानते हैं वहां से सीधा सामने चांदनी चौक नजर आता है। जहां पर बहुत सारी बिल्डिंग है। इसलिए सुरक्षा कारणों से मेरी सलाह थी कि आप एक बार फिर से विचार कर लें।"

इस पर प्रधानमंत्री का जवाब साफ था। माथुर ने बताया, "हमारे बोलने के बाद प्रधानमंत्री का रिएक्शन सिर्फ इतना था कि यह नहीं होगा तो मैं नहीं बोलूंगा?"

पीएम मोदी के इस फैसले के बाद अधिकारियों का रुख बदल गया। आरके माथुर ने कहा, "उसके साथ ही मेरा और डायरेक्टर का निर्णय चेंज हो गया कि ये बुलेटप्रूफ ग्लास वहां पर नहीं रहेगा।"

सुरक्षा एजेंसियों ने आखिरी समय पर यह बैरियर हटवा दिया। माथुर के मुताबिक, "यह बुलेटप्रूफ ग्लास भी 14-15 अगस्त की देर रात को हटाया गया।"

इसके बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से बिना किसी बैरियर के देश को संबोधित करने पहुंचे। यह घटना प्रधानमंत्री के 'जनता से सीधे जुड़ाव' के तौर पर आज भी याद की जाती है।

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Created On :   15 Aug 2026 2:44 PM IST

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