दक्षिण कोरिया राष्ट्रपति ली का बड़ा प्रस्ताव, प्योंगयांग के सामने रखी बातचीत की पेशकश
सोल, 15 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने शनिवार को उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का बड़ा प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने और प्योंगयांग के परमाणु कार्यक्रम की प्रगति रोकने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा शुरू करने की पेशकश की। ली ने कहा कि उनका लक्ष्य कोरियाई प्रायद्वीप पर मौजूदा अस्थिर युद्धविराम व्यवस्था की जगह स्थायी शांति व्यवस्था स्थापित करना है।
योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि ली ने यह प्रस्ताव दक्षिण कोरिया के 81वें लिबरेशन डे के मौके पर आयोजित समारोह में दिया। यह दिवस 1910 से 1945 तक चले जापानी औपनिवेशिक शासन से कोरिया की मुक्ति की याद में मनाया जाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे को धमकी देने की मानसिकता छोड़कर सीधे बातचीत की मेज पर आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों कोरिया युद्ध समाप्त करने के लिए सीधे पक्षकार के तौर पर चर्चा शुरू कर सकते हैं और इसी प्रक्रिया में उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमताओं के विस्तार को रोकने के प्रभावी तरीकों पर भी विचार किया जा सकता है।
उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच 1950 से 1953 तक युद्ध चला था। 1953 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ, लेकिन कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हुई। इसी कारण दोनों देश तकनीकी रूप से आज भी युद्ध की स्थिति में माने जाते हैं। ली ने इसी अस्थिर युद्धविराम व्यवस्था को स्थायी शांति व्यवस्था में बदलने की बात कही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस दिशा में यात्रा शुरू करेंगे और दोनों देशों के बीच टकराव के बजाय शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता तलाशेंगे। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की मौजूदा व्यवस्था का सम्मान करता है और उसका उद्देश्य बलपूर्वक एकीकरण या किसी तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करना नहीं है।
ली का यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर कोरिया ने उनके प्रशासन की ओर से की गई पिछली कई सुलह की कोशिशों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसके बावजूद दक्षिण कोरिया ने उत्तर के साथ संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
ली ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए अनावश्यक टकराव कम करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दोनों पक्षों की धारणाओं, नियमों और व्यवस्थाओं में मौजूद शत्रुता को कम करने की जरूरत बताई।
उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम इस पूरी पहल की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ली ने पहली बार नहीं बल्कि अपनी सरकार की व्यापक नीति के तहत उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से रोकने की दिशा में बातचीत की वकालत की है। जुलाई में भी उन्होंने कहा था कि दक्षिण कोरिया शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ-साथ कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में चरणबद्ध प्रयास करेगा।
हालांकि, प्योंगयांग की ओर से बातचीत को लेकर अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। ऐसे में ली की पहल का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्तर कोरिया इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
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Created On :   15 Aug 2026 2:44 PM IST












