‘आप’ छोड़ भाजपा में गए राज्यसभा सांसद अपने दम पर पंचायत चुनाव भी नहीं जीत सकते सीएम उमर अब्दुल्ला

‘आप’ छोड़ भाजपा में गए राज्यसभा सांसद अपने दम पर पंचायत चुनाव भी नहीं जीत सकते सीएम उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि ये सांसद अपने दम पर एक भी पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते।

बेंगलुरु, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि ये सांसद अपने दम पर एक भी पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते।

बेंगलुरु में राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के आप छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर इन लोगों ने पार्टी छोड़ दी है तो ठीक है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे आम आदमी पार्टी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान होगा। थोड़ा नुकसान होने की उम्मीद जरूर है।

उन्होंने कहा कि सात राज्यसभा सांसद भाजपा में चले गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अकेले अपने दम पर एक भी सीट जीतने के काबिल नहीं है। मुझे नहीं लगता कि इनके भाजपा में आने से जमीनी स्तर पर भाजपा को 10 वोट का भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इन सांसदों में कोई भी ऐसा नहीं है कि जो पंचायत चुनाव भी अपने दम पर निकालने की क्षमता रखता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण की वोटिंग प्रतिशत पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी के अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही 25 प्रतिशत मतदाता कम हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसी 70 सीटें हैं, जहां मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव में भाजपा की जीत या हार के अंतर से भी ज्यादा है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने हमेशा से कहा है कि ईवीएम का खतरा नहीं है, बल्कि वोटर लिस्ट में धांधली का खतरा है। कोर्ट को इस पर नोटिस लेना चाहिए था, लेकिन चुनाव तक मामले को टाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, वे या तो भाजपा के प्रेस नोट को छाप रहे हैं या फिर आंकड़ों की गहराई से जांच नहीं की है। वास्तव में वोटरों की संख्या घटी है। एसआईआर की वजह से बड़ी संख्या में वोटरों को सूची से बाहर रखा गया है, जिससे वोटिंग प्रतिशत बढ़ता दिख रहा है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए 73 राज्यसभा सांसदों द्वारा नोटिस दिए जाने पर कहा कि अब यह मामला संसद के सामने है। देखते हैं कि वहां क्या होता है। भले ही इसका कोई नतीजा न निकले, लेकिन इतने सारे सांसदों के हस्ताक्षर करने की बात मुख्य चुनाव आयुक्त को कम से कम यह सोचने पर तो मजबूर कर ही देनी चाहिए कि उनके काम में कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है।

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Created On :   25 April 2026 5:09 PM IST

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