आत्मनिर्भरता और संयुक्तता भविष्य की सैन्य तैयारी की कुंजी राजनाथ सिंह

आत्मनिर्भरता और संयुक्तता भविष्य की सैन्य तैयारी की कुंजी राजनाथ सिंह
आने वाले समय में किसी भी देश की ताकत इस बात से तय होगी कि उसकी सेनाएं, प्रयोगशालाएं और रक्षा उद्योग कितनी तेजी और एकजुट होकर काम करते हैं। यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनिवार्य बताया।

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। आने वाले समय में किसी भी देश की ताकत इस बात से तय होगी कि उसकी सेनाएं, प्रयोगशालाएं और रक्षा उद्योग कितनी तेजी और एकजुट होकर काम करते हैं। यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। इसके साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनिवार्य बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य का युद्धक्षेत्र उन्हीं देशों को बढ़त देगा जो किसी विचार को तेजी से प्रोटोटाइप में बदलकर उसे कम समय में सैन्य संचालन में उतार सकेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव, साइबर खतरे, सप्लाई चेन की कमजोरियां और हाइब्रिड युद्ध जैसी नई चुनौतियों के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा पुराने दृष्टिकोणों पर आधारित नहीं रह सकती। दरअसल नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में गुरुवार को ‘कलाम एंड कवच 3.0’ रक्षा रणनीतिक संवाद आयोजित किया गया था। राजनाथ सिंह ने यहां एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी ये बातें रखीं।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, रणनीतिक विशेषज्ञ और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तैयारी, नवाचार और रणनीतिक आत्मविश्वास बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है। यदि कोई देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यधिक रूप से दूसरे देशों पर निर्भर रहता है तो संकट के समय वह कमजोर साबित हो सकता है। भारत को अपने रक्षा तंत्र के भीतर ही प्रमुख प्रणालियों का डिजाइन, विकास, उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन करना होगा। तभी देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रख सकेगा।

उन्होंने आधुनिक युद्ध में सैन्य बलों की संयुक्तता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल थल, जल और वायु तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेनाएं, रक्षा प्रयोगशालाएं, उद्योग, स्टार्टअप, नीति निर्माता और सैन्य संस्थान कितनी प्रभावी साझेदारी के साथ काम करते हैं।

यहां मौजूद रहे रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि ‘कलाम एंड कवच’ ऐसा मंच है, जहां विचार और राष्ट्रीय उद्देश्य एक साथ आते हैं। उन्होंने कहा कि ‘कलाम’ ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का प्रतीक है, जबकि ‘कवच’ सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा की जिम्मेदारी का प्रतीक है।

रक्षा राज्य मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को नए भारत की क्षमता का उदाहरण बताया। संजय सेठ ने बताया कि एक दशक पहले रक्षा निर्यात जहां केवल 686 करोड़ रुपए था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

वहीं, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए स्वदेशी नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की रक्षा क्षमता आत्मनिर्भरता तथा अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता पर आधारित होनी चाहिए।

सम्मेलन में एआई आधारित युद्ध प्रणाली, स्वायत्त हथियार प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम आधारित प्रणाली, रक्षा विनिर्माण विस्तार, एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय सत्र और पैनल चर्चा आयोजित की गईं।

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Created On :   14 May 2026 6:19 PM IST

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