Delhi News: ACFI ने किया 7वें वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 का ऐलान, एयर कार्गो और बेहतर सप्लाई चेन के भविष्य पर होगा वैश्विक विचार-विमर्श

ACFI ने किया 7वें वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 का ऐलान, एयर कार्गो और बेहतर सप्लाई चेन के भविष्य पर होगा वैश्विक विचार-विमर्श
एयर कार्गो फोरम इंडिया (ACFI) ने आज अपने प्रमुख वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 के सातवें संस्करण की घोषणा की, जो 12–13 अगस्त 2026 को ताज पैलेस, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। एयर कार्गो फोरम इंडिया (ACFI) ने आज अपने प्रमुख वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 के सातवें संस्करण की घोषणा की, जो 12–13 अगस्त 2026 को ताज पैलेस, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। लॉजिस्टिक्स शक्ति के स्ट्रैटेजिक पार्टनर के रूप में जुड़ने के साथ, इस दो दिवसीय कॉन्क्लेव में 700 से ज़्यादा प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। इन प्रतिनिधियों में दुनिया के कार्गो इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज, पॉलिसीमेकर्स, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स, इन्वेस्टर्स, एयरलाइंस, एयरपोर्ट ऑपरेटर्स, फ्रेट फॉरवर्डर्स, कस्टम्स प्रोफेशनल्स और सप्लाई चेन स्टेकहोल्डर्स एयर कार्गो, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक लचीलेपन (ट्रेड रेजिलिएंस) के भविष्य की दिशा तय करने के लिए वैश्विक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के दिग्गज एक मंच पर इकट्ठा होंगे।

रीइमेजिनिंग ग्लोबल ट्रेड - इंडिया एट द फोरफ्रंट ऑफ डेवलपिंग रेसिलिएंट सप्लाई चेन्स”थीम के साथ कॉन्क्लेव में यह देखा जाएगा कि वैश्विक राजनीतिक उतार-चढ़ाव, बदलते ट्रेड कॉरिडोर, डिजिटल बदलावों और सस्टेनेबिलिटी दबावों के बीच भारत वैश्विक व्यापार के लिए एक स्ट्रेटेजिक हब के तौर पर अपनी भूमिका को कैसे मजबूत कर सकता है। 2026 संस्करण एयर कार्गो इकोसिस्टम में इनोवेशन, कोलेबोरेशन और ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस करेगा। इसमें AI-इनेबल्ड लॉजिस्टिक्स, डिजिटल एयर वेबिल, ऑटोमेशन, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और सस्टेनेबल एविएशन समाधानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कॉन्क्लेव में भारत सरकार के माननीय सिविल एविएशन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू से कॉन्क्लेव में चीफ गेस्ट के तौर पर आने का अनुरोध किया गया है, साथ ही भारत सरकार और मुख्य रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ के कई जाने-माने लोग भी इसमें शामिल होंगे।

एयर कार्गो फोरम इंडिया (ACFI) के अध्यक्ष और जीएमआर ग्रुप के कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स के सीईओ संजीव एडवर्ड ने कहा, “वर्तमान समय में वैश्विक सप्लाई चेन केवल कम लागत और तेज़ डिलीवरी तक ही सीमित नहीं रह गई हैं। अब इसकी सफलता के लिए लचीलापन (रेजिलिएंस), विश्वसनीयता और डिजिटल कनेक्टिविटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। भारत के पास तेजी से विकसित हो रहे हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सरकार की नीतिगत पहल के दम पर दुनिया के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरने का बड़ा अवसर है। ACFI वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 में दुनिया भर के नीति-निर्माता, इंडस्ट्री विशेषज्ञ और कारोबारी नेता एक मंच पर इकट्ठा होंगे। वे विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, नई साझेदारियां करेंगे और मिलकर ऐसा आधुनिक एयर कार्गो इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम करेंगे, जो आने वाले दशक के वैश्विक व्यापार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार हो।”

एयर कार्गो फोरम इंडिया (ACFI) के उपाध्यक्ष और एयर इंडिया लिमिटेड के कार्गो हेड रमेश ममीडाला ने कहा, “पिछले कुछ सालों से एयर कार्गो इंडस्ट्री में बहुत बड़ा बदलाव हो रहा है। बदलते व्यापारिक रास्तों और ई-कॉमर्स के बढ़ते वॉल्यूम से लेकर गति, पारदर्शिता और स्थिरता की बढ़ती उम्मीदों तक, इस सेक्टर को लगातार खुद को ढालना होगा। यह कॉन्क्लेव डिजिटलीकरण, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, नियामकीय सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने जैसे अहम विषयों पर व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। इन पहलों के माध्यम से भारत की वैश्विक लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत बन सकती है।”

एयर कार्गो फोरम इंडिया (ACFI) के इवेंट मैनेजमेंट के चेयरमैन, करनजीत सिंह वाधवा ने कहा, “इस साल के कॉन्क्लेव का उद्देश्य बातचीत से आगे बढ़कर इंडस्ट्री के लिए अच्छे परिणाम हासिल करना है। इस कार्यक्रम को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि यह दुनिया भर के एयर कार्गो इकोसिस्टम से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच ज्ञान साझा करने, व्यावसायिक नेटवर्किंग और साझा चुनौतियों के समाधान को बढ़ावा दे। नीति-निर्माताओं, एयरलाइंस, एयरपोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और टेक्नोलॉजी प्रदाताओं को एक मंच पर लाकर हमारा उद्देश्य ऐसे नए विचारों, सहयोग और साझेदारियों को बढ़ावा देना है, जो एयर कार्गो सेक्टर के विकास को गति प्रदान कर सके।”

दुनिया में राजनीतिक उथल पुथल के बावजूद FY26 में भारत का एयर कार्गो वॉल्यूम 6.2% बढ़कर 39.63 लाख टन हो गया। इसमें दिल्ली सबसे बड़ा हब बना हुआ है, जबकि चेन्नई में इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट की वजह से 11.7% की वृद्धि हुई। कुल माल ढुलाई में इंटरनेशनल कार्गो का हिस्सा 64% था, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, पेरिशेबल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और ई-कॉमर्स सबसे ज्यादा रहे।

भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर सामान तेज़ी से डिलीवर करने के लिए AI-बेस्ड रूट प्लानिंग, ऑटोमेटेड वेयरहाउस और डिजिटल एयर वेबिल का तेज़ी से इस्तेमाल कर रहा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी सरकारी पहलों ने मोबाइल फ़ोन और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक्सपोर्ट भी बढ़ाया है। इससे तेज़ और टाइम-सेंसिटिव शिपमेंट के लिए एयर कार्गो ज़रूरी हो गया है।

जैसे-जैसे ये बदलाव इंडस्ट्री को बदल रहे हैं, एक्सपर्ट्स इसके भविष्य को लेकर उम्मीद बनाए हुए हैं। आने वाले सालों में वैश्विक हालात बेहतर होने पर भारत के एयर कार्गो सेक्टर के तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और ग्लोबल कंपनियों से बढ़े हुए निवेश इस ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे। इस माहौल में इस कॉन्क्लेव से भारत के कार्गो और एक्सपोर्ट सेक्टर के भविष्य को बनाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में देश की भूमिका को मज़बूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


Created On :   11 July 2026 8:14 PM IST

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