केजरीवाल ने दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन को दिया राजनीतिक संरक्षण गौरव भाटिया

केजरीवाल ने दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन को दिया राजनीतिक संरक्षण  गौरव भाटिया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आए न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय, कानून, संविधान और जनता की जीत बताया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर मुख्य अभियुक्त ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण देने तथा कांग्रेस नेतृत्व पर भी दंगों के दौरान भड़काऊ माहौल बनाने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने मंगलवार को दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आए न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय, कानून, संविधान और जनता की जीत बताया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर मुख्य अभियुक्त ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण देने तथा कांग्रेस नेतृत्व पर भी दंगों के दौरान भड़काऊ माहौल बनाने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

गौरव भाटिया ने कहा कि सोमवार को दिल्ली दंगों को लेकर न्यायपालिका ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह फैसला ऐतिहासिक होने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करता है कि आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की जिस तरह जघन्य हत्या की गई, उस मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया गया है। अभी पूरा निर्णय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और उसका अध्ययन नहीं हो पाया है, लेकिन जो टिप्पणियां अब तक सामने आई हैं, उनके आधार पर हम 'आप' के संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा कांग्रेस पार्टी के सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा की गई ओछी व घटिया राजनीति को न्यायालय की टिप्पणियों के संदर्भ में सभी के समक्ष रखना चाहेंगे।

उन्होंने कहा कि इस मामले का प्रमुख अभियुक्त ताहिर हुसैन है। जब यह जघन्य अपराध हुआ, उस समय ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी का निर्वाचित पार्षद था और अरविंद केजरीवाल का खास था। ताहिर हुसैन कानून और हिंदुओं से नफरत करने वाला व्यक्ति है। जब अंकित शर्मा अपने कर्तव्य का पालन करते हुए भीड़ के सामने आए, तब आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल के दाहिने हाथ रहे ताहिर हुसैन ने भड़काऊ बयान दिए और इस पूरी घटना को अंजाम दिया। अब सवाल यह उठता है कि जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तब उनके पार्षद ताहिर हुसैन पर दंगा कराने और एक आईबी अधिकारी की हत्या कराने के आरोप लगे। भाजपा ने इस मुद्दे पर पूरी प्रखरता के साथ प्रेस वार्ता की थी और यह जनता का मुद्दा था। यदि कोई इस मामले में मिट्टी का तेल लेकर चल रहा था, तो वह अरविंद केजरीवाल थे। जब मार्च 2020 में यह मुद्दा संसद के पटल पर आया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने वक्तव्य में कहा था कि जो भी आरोपी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, एक-एक को पकड़ा जाएगा और उन्हें सजा मिलेगी। आज जब यह फैसला आया है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह न्याय, जनता, कानून और संविधान की जीत है।

भाटिया ने कहा कि यदि आज भी ताहिर हुसैन को कोई राजनीतिक संरक्षण दे रहा है, तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान ने बयान दिया है कि देश के न्यायालय ने साक्ष्यों, प्रमाणों और गवाहों की गवाही के आधार पर जो सजा दी है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। अमानतुल्लाह खान इसे दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं लेकिन देश के लिए शहादत देने वाले अंकित शर्मा के साथ जनता तथा भाजपा खड़ी है, उनके लिए उनके मुख से एक शब्द भी नहीं निकला। इसके विपरीत एक दोषसिद्ध व्यक्ति के पक्ष में इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया जा रहा है। क्या यह वोटबैंक की राजनीति नहीं है? क्या अब अरविंद केजरीवाल स्वयं को न्याय तथा न्यायालय से भी ऊपर मानने लगे हैं?

उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित शर्मा के शरीर पर 51 बार चाकू से वार किए जाने के निशान थे। इतनी नफरत और ऐसा द्वेष क्यों था, जबकि उनका कसूर केवल इतना था कि वह एक आईबी अधिकारी के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे थे। आज जब इस फैसले की बात हो रही है, तब अमानतुल्लाह खान इतने साहस के साथ बाहर आकर यह कहते हैं कि ताहिर हुसैन को उसके धर्म के आधार पर सजा हुई है और उसके साथ नाइंसाफी हो रही है। यही 'आप' के अरविंद केजरीवाल का चरित्र और डीएनए है। यदि ताहिर हुसैन के साथ किसी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है, तो वह अरविंद केजरीवाल की है, जिनके इशारे पर यह सब हुआ और जिन्होंने पूरे मामले में लीपापोती की। मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने न तो अंकित शर्मा के लिए एक शब्द कहा और न ही दिल्ली दंगों में मारे गए लगभग 60 भारतीय नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

गौरव भाटिया ने कहा कि जब इन दंगों की साजिश रची जा रही थी, तब सोनिया गांधी का बयान था कि "यह लड़ाई आर-पार की लड़ाई है। घर से निकलो, आर-पार की लड़ाई लड़ो।" जब किसी की नागरिकता जा ही नहीं रही थी और संविधान के अनुसार संसद ने एक कानून पारित किया था, तब यह आर-पार की लड़ाई किससे थी और इसका कारण क्या था? सोनिया गांधी ने सौहार्द बनाए रखने की अपील करने के बजाय यह नहीं कहा कि उन्होंने कानून पढ़ा है, उसमें क्या अच्छाइयां, क्या कमियां और क्या सुझाव हैं, जबकि एक वरिष्ठ नेता के रूप में ऐसा कहना कतई सही नहीं था। इसके स्थान पर सोनिया गांधी ने जनता, विशेषकर मुसलमानों, से यह कहते हुए आह्वान किया कि उनकी नागरिकता चली जाएगी। इसके बाद आर-पार की लड़ाई जैसी बात कही गई। जब कोई वरिष्ठ नेता धर्म के चश्मे से देखकर ऐसे भड़काऊ बयान देता है और उसके बाद दंगे होते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी सोनिया गांधी को भी लेनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी हों, राहुल गांधी हों, अरविंद केजरीवाल हों, समाजवादी पार्टी हो, ममता बनर्जी हों अथवा अन्य तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दल, किसी ने भी यह नहीं कहा कि वे कानून और पीड़ित परिवारों के साथ हैं। इन सभी ने केवल तुष्टिकरण की राजनीति की, मस्जिद गए, एक वर्ग की बात की और अपराधी के पक्ष में खड़े होने का प्रयास किया। यह अत्यंत चिंताजनक है। हम पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कहना चाहते हैं कि इस न्यायिक फैसले का भाजपा सम्मान भी करती है और उसका स्वागत भी करती है।

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Created On :   14 July 2026 5:25 PM IST

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