असदुद्दीन ओवैसी और राहुल गांधी जैसे लोग एक ही डीएनए के हैं मुफ्ती वजाहत कासमी
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की आलोचना, एसआईआर को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी, दिल्ली हाई कोर्ट के पॉक्सो को लेकर फैसले और महमूद मदनी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, "क्या इन सभी संगठनों ने, खासकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने, दिल्ली को विरोध-प्रदर्शन की राजधानी मान लिया है? दिल्ली में करोड़ों लोग रहते हैं। दिल्ली शहर को अपना काम करने देना चाहिए। दिल्ली के लोगों को परेशानी होती है। इसलिए, उन्हें इस देश में बार-बार विरोध-प्रदर्शन का यह खेल नहीं खेलना चाहिए। कांग्रेस के जमाने से ही यह लंबा इतिहास रहा है कि जो भी मुख्य चुनाव आयुक्त होता था, उसे रिटायरमेंट के बाद गवर्नर या राज्यसभा सांसद बना दिया जाता था। अगर पारदर्शिता थी, तो फिर यह सब क्यों हो रहा था?"
असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, "असदुद्दीन ओवैसी और राहुल गांधी जैसे लोग एक ही डीएनए के हैं। ये लोग जब चुनाव जीतते हैं तो खुद जीतते हैं और जब हार जाते हैं तो चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल खड़े देते हैं। मेरा एक सवाल है कि बंगाल समेत कई जगहों पर एसआईआर की प्रक्रिया से लाखों बांग्लादेशियों को चुनाव आयोग ने निकाला है। इस पर कोई बात करने को क्यों तैयार नहीं है। यानी क्या विपक्ष यही चाहता है कि हमारे देश के संसाधनों पर दूसरे लोग का कब्जा हो? चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो अपना काम कर रही है, इसलिए सफाई की कोई बात नहीं है।"
पर्सनल लॉ और पॉक्सो को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी पर मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, "हाईकोर्ट की ओर से अच्छी टिप्पणी की गई है, हमारे लिए देश का संविधान सर्वोपरि है। पर्सनल लॉ कुछ भी नहीं है। मुसलमानों के लिए शरियत पर्सनल लॉ है। देश के 140 करोड़ लोगों के लिए संविधान और कानून है। मैं अपनी ओर से यही बात मुस्लिम पर्सनल लॉ और मुस्लिम संगठनों को समझा रहा हूं। पर्सनल लॉ पर कितने मुसलमान अमल कर रहे हैं, ये लोग बेटियों को अधिकार नहीं देते। बेटियों को अधिकार देने को लेकर कोई मौलाना और पर्सनल लॉ भी बात नहीं करता है। मुसलमानों से मेरा कहना है कि ये सब बातें न करें और संविधान से चलें तो बेहतर है।"
महमूद मदनी की ओर से यूएन का दरवाजा खटखटाने की बात कहे जाने पर मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, "महमूद मदनी एक ऐसा संगठन चलाते हैं, जो चंद देवबंदी मुसलमानों का एक संगठन है। अगर उनकी ओर से ऐसी बात कही जा रही है तो देश में एक बड़ा टोला है, जो अंतरराष्ट्रीय लेवल पर मुसलमानों को बदनाम करता है। पूरी दुनिया में किसी भी मजहब के लिए सबसे ज्यादा शांति, शानदान और खूबसूरत मुल्क भारत है। महमूद मदनी को यह बात अच्छे से पता है। उनकी ओर से राजनीति की जा रही है।"
मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, "मुझे हैरानी हो रही है कि हामिद अंसारी जब उपराष्ट्रपति पद से हटते हैं तो उनको लगता है कि देश में मुसलमान सुरक्षित नहीं है। महमूद मदनी दोबारा राज्यसभा नहीं जा पा रहे हैं। यह एक टोला है, जो पहले सरकारों को ब्लैकमेल करता था। यह सरकार काफी मजबूत और निर्णय लेती है। इसलिए यह सरकार किसी मामले में पीछे नहीं हटती है। इन लोगों से मेरी अपील है कि अंतरराष्ट्रीय लेवल में दुनिया को वे ये संदेश देने की कोशिश न करें कि देश का मुसलमान परेशान है। भारत का मुसलमान बहुत ताकत, शान और खूबसूरती के साथ संविधान को मानते हुए इस देश में अमन के साथ जी रहा है। यहां कोई मुसलमान परेशान नहीं है।"
मुफ्ती वजाहत कासमी आगे कहा, "इनके पास अपना संगठन है, इन लोगों ने कभी मस्जिदों, मदरसों के दस्तावेज और नक्शों को सभी ठीक करने की कोशिश नहीं की है। आज जो मस्जिदें गिराई जा रही हैं, सभी मदमूद मदनी की ओर से अभियान चलाया गया है कि मस्जिदों में मानक पूरे हों और मस्जिदों को कानूनी तरीके से बनाई जाएं और उनके नक्शें हो और मदरसे रजिस्टर्ड हों। इनकी ओर से कभी कोई अभियान नहीं चलाया गया। इन लोगों की ओर से सरकार को हमेशा दोषी ठहराया जाता है और मुसलमानों के मन में आशंका पैदा करने की कोशिश की जाती है कि तुम्हारे हर मामले की दोषी सरकार है। मैं इसकी निंदा करता हूं।"
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Created On :   27 Sept 2026 2:30 PM IST












