असीरगढ़ किले का अनसुलझा राज, बंद दरवाजों के बावजूद कौन करता है महादेव की पूजा?
असीरगढ़, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित असीरगढ़ किला अपने इतिहास और रहस्यों के लिए काफी मशहूर है। लेकिन, इस किले के अंदर मौजूद एक प्राचीन शिव मंदिर इसे और भी खास बना देता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब किले के दरवाजे रात में बंद रहते हैं, तो सुबह शिवलिंग की पूजा कौन करके जाता है।
स्थानीय लोगों की मानें तो इस मंदिर में आज भी महाभारत के पात्र अश्वत्थामा पूजा करने आते हैं। यह दावा भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन यहां के लोगों के बीच यह मान्यता काफी गहरी है। लोग बताते हैं कि किले के दरवाजे शाम को बंद कर दिए जाते हैं और सुबह करीब 11 बजे ही खोले जाते हैं। इस दौरान किसी भी इंसान का अंदर जाना लगभग नामुमकिन होता है।
लेकिन हैरानी की बात तब होती है जब सुबह मंदिर के दरवाजे खुलते हैं। कई बार देखा गया है कि शिवलिंग पर ताजे फूल चढ़े होते हैं। अब सवाल ये है कि जब कोई अंदर गया ही नहीं, तो ये पूजा किसने की? यही बात इस जगह को रहस्यमयी बना देती है।
गांव के बुजुर्गों की कहानियां इस रहस्य को और गहरा कर देती हैं। कुछ लोग बताते हैं कि उन्होंने अपने बड़ों से सुना है कि अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और समय-समय पर इस मंदिर में पूजा करने आते हैं। कुछ का दावा तो यह भी है कि उन्होंने एक बहुत लंबे और अलग दिखने वाले व्यक्ति को इस इलाके में देखा है, जिसे लोग अश्वत्थामा मानते हैं। हालांकि, इन दावों का कोई पुख्ता सबूत नहीं है, लेकिन लोगों की आस्था इन बातों को और मजबूत बनाती है।
असीरगढ़ का यह शिव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का संगम भी है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। खासकर महाशिवरात्रि के मौके पर तो यहां मेले जैसा माहौल होता है। दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
यही वजह है कि असीरगढ़ किले का यह शिव मंदिर आज भी लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। आस्था रखने वाले इसे चमत्कार मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे महज एक कहानी समझते हैं।
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Created On :   2 April 2026 2:44 PM IST












