बैंक घोटाला केस ईडी ने हिरेन भानु परिवार की 16.95 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की
मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल ऑफिस ने पीएमएलए के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए हिरेन भानु और उनके परिवार से जुड़ी 33 अचल और चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। जब्त की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, फ्लैट, कमर्शियल ऑफिस और कृषि भूमि शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 16.95 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
ईडी ने यह जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला बैंक से करीब 122 करोड़ रुपए के कैश गबन से जुड़ा है।
जांच के दौरान सामने आया कि ‘न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड’ (एनआईसीबीएल) के पूर्व जनरल मैनेजर और अकाउंट्स हेड हितेश प्रवीणचंद्र मेहता ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर और विभिन्न शाखाओं के बीच नकली कैश ट्रांसफर के रिकॉर्ड बनाकर बैंक के फंड को अवैध रूप से निकालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने लंबे समय तक इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने की बात भी स्वीकार की है।
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह पूरा घोटाला बैंक के पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन हिरेन भानु के निर्देश पर किया गया था। हिरेन भानु कई वर्षों तक बैंक के संचालन पर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से नियंत्रण बनाए हुए थे। उनकी पत्नी गौरी हिरेन भानु, जिन्होंने बैंक की कार्यवाहक चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के रूप में काम किया था, भी इस गबन की गई राशि के लाभार्थियों में शामिल पाई गई हैं। जांच के मुताबिक, हिरेन भानु और उनकी पत्नी ने कथित तौर पर ‘अपराध से अर्जित आय’ (पीओसी) के रूप में कम से कम 26 करोड़ रुपए प्राप्त किए।
आगे की जांच में यह भी सामने आया कि हिरेन भानु ने बैंक के कुछ कर्जदारों के साथ मिलीभगत कर विदेश में स्थित एक कंपनी को बिना कोई वास्तविक भुगतान किए अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद, उन्हीं भारतीय कर्जदारों के माध्यम से, जिन्हें बैंक द्वारा बड़े पैमाने पर ऋण स्वीकृत किए गए थे, विदेशी कंपनियों के खातों में धन पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित वित्तीय साजिश का हिस्सा था।
मामले में ईओडब्ल्यू, मुंबई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और हिरेन भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट के साथ उद्घोषणा की कार्यवाही भी शुरू की जा चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फिलहाल आरोपी देश से बाहर हैं और उन्होंने जांच में कोई सहयोग नहीं किया है। इसके अलावा, उन फंड्स की भी जांच की जा रही है, जिन्हें बैंक से विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं को भेजा गया था, जिससे बैंक और उसके जमाकर्ताओं के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई।
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Created On :   8 April 2026 6:54 PM IST












