उम्मीद की कतारें: तड़के 4 बजे से कतारों में खड़े आक्रोशित लोगों के चेहरों पर थकान - आंखों में बेचैनी और दिल में सवाल, आखिर कब खत्म होगी यह परेशानी

तड़के 4 बजे से कतारों में खड़े आक्रोशित लोगों के चेहरों पर थकान - आंखों में बेचैनी और दिल में सवाल, आखिर कब खत्म होगी यह परेशानी
  • लोग पूछ रहे हैं- जब प्रशासन ने कहा सिलेंडर की कोई दिक्कत नहीं तो आखिर माजरा क्या है
  • सिर्फ एक सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करते हैं
  • लाइन में खड़ी महिलाएं अपनी परेशानी बताते-बताते भावुक हो गईं

Nagpur News. तड़के अंधेरा अभी पूरी तरह छंटा भी नहीं होता… नींद से बोझिल आंखें, हाथ में कूपन और मन में एक ही चिंता और सवाल, आज सिलेंडर मिलेगा या नहीं? इन दिनों सैकड़ों लोगों की यही रोजमर्रा की कहानी बन गई है। नारी रोड स्थित संगीता गैस एजेंसी के बाहर हर सुबह यही नाजार दिखाई देता है, जहां लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए लंबी कतार में खड़े रहते हैं। जिससे कपिल नगर, मैत्री कॉलोनी, दीपक नगर के अलावा आसपास इलाकों के उपभोक्ता खासे परेशान हैं।


सुबह-सुबह घरों से निकलकर आए ये लोग सिर्फ एक सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करते हैं। उम्मीद बस इतनी कि आज जैसे-तैसे गैस मिल जाए, ताकि घर का चूल्हा जल सके। लेकिन यह उम्मीद हर दिन पूरी हो, ऐसा मुश्किल हो रहा है। कई बार घंटों खड़े रहने के बाद सिर्फ यह सुनने को मिलता है कि आज वाहन नहीं आया और लोग मायूस होकर लौट जाते हैं। कभी स्टॉक खत्म होने की बात कही जाती है। ऐसे में कई बार नाराजगी बढ़ जाती है और विवाद की स्थिति भी बन जाती है। सवाल यही उठता है कि जब प्रशासन की ओर से किसी कमी की बात नहीं कही जा रही, तो फिर आम लोगों को इस परेशानी से क्यों गुजरना पड़ रहा है?


लाइन में खड़ी महिलाएं अपनी परेशानी बताते-बताते भावुक हो गईं। कोई अपने छोटे बच्चों को घर छोड़कर आई है, तो किसी के बच्चे की परीक्षा चल रही है। कईयों को काम पर भी जाना होता है, लेकिन यहां की लंबी कतारें उन्हें बांधे रखती है। ऑनलाइन बुकिंग करने के बावजूद पहले कूपन के लिए लाइन, फिर सिलेंडर के लिए अलग से इंतजार, यह झंझट खत्म होने का नाम नहीं लेता।

एक उपभोक्ता ने बताया कि तड़के पांच बजे से यहां खड़े हैं सिलेंडर नहीं मिल रहा, टोकन देकर कह दिया गया है, आज गाड़ी नहीं आएगी। बोर्ड पर लिख दिया कि वाहन नहीं आया, जब्कि 7 मार्च की बुकिंग है।

दूसरे उपभोक्ता ने बताया कि लाइन में लगने के बाद उसका सिलेंडर चोरी हो गया था, काफी ढूंढा तब जाकर वहीं थोड़ा आगे पड़ा मिला।

महिला उपभोक्ता ने बताया कि एजेंसी का दफ्तर भी नहीं खुल रहा है, किसी से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। जो वाट्सएप ग्रुप है, उसपर लोग बार बार मैसेज कर रहे हैं, लेकिन एजेंसी संचालक और कर्मचारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।


दिन चढ़ता जाता है… सूरज की तपिश बढ़ती है, लेकिन लोगों की परेशानी कम नहीं होती। भूखे-प्यासे, हाथों में कूपन पकड़े लोग बस एक उम्मीद के सहारे खड़े रहते हैं। चेहरों पर थकान, आंखों में बेचैनी और दिल में सवाल, आखिर कब खत्म होगी यह परेशानी?


सबसे ज्यादा तकलीफ बुजुर्गों को होती है, जो अपनी कमजोरी के बावजूद घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। वहां न बैठने की कोई व्यवस्था है, न पीने के पानी की सुविधा। यह नजारा सिर्फ एक गैस सिलेंडर की लाइन नहीं, बल्कि आम आदमी की मजबूरी, संघर्ष और व्यवस्था की खामियों की एक जीवंत तस्वीर बन चुका है।






Created On :   8 April 2026 8:29 PM IST

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