यूडीएफ का स्वास्थ्य मंत्री को पत्र: पायलटों के समान हो रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी, जीवनरक्षा के कामों पर थकान का बुरा असर न पड़े - जानिए क्या हैं नियम

Mumbai News. स्वास्थ्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसकी एक अनुशंसा ने देश के रेजिडेंट डॉक्टरों में नई उम्मीद जगा दी है। समिति ने उनकी ड्यूटी के नियम पायलटों की तरह रखने का सुझाव दिया है। दोनों का काम जीवनरक्षा से जुड़ा होने के कारण इन पर काम की थकान का बुरा असर न पड़े। सांसद प्रो. रामगोपाल यादव की अध्यक्षता में गठित समिति में लोकसभा के 10 और राज्यसभा के 31 सदस्य हैं। समिति ने 337 पेज की अपनी रिपोर्ट नंबर 172 प्रस्तुत की है। इसमें कहा गया है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की लगातार अत्यधिक ड्यूटी के कारण थकान और इलाज में त्रुटियों की संभावना होती है। इससे रोगी की सुरक्षा से समझौता होता है। समिति अनुशंसा करती है कि डॉक्टरों की थकान के कारण दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जीवन सुरक्षा से जुड़े सिविल एविएशन जैसे काम से तुलना करे।
रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए अनिवार्य आराम अवधि और निगरानी वाले रोस्टर के साथ एक 'क्लिनिकल ड्यूटी घंटे विनियमन' नीति तैयार करे और सख्ती से लागू करे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मेडिकल स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ पर नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट आई थी। उसके अनुसार अत्यधिक कार्यभार और तनाव के कारण 37 फीसदी मेडिकल स्टूडेंट्स में आत्महत्या के विचार पाए गए। साथ ही, 11 प्रतिशथ% स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की भी योजना बना ली थी। रिपोर्ट के अनुसार 7 प्रतिशत आत्मघाती व्यवहार के भविष्य के जोखिम का आकलन किया तथा 19.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने आत्मघाती व्यवहार प्रदर्शित किया।
यूडीएफ ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र
यूडीएफ के चेयरपर्सन डॉ लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए पायलटों जैसा ड्यूटी नियम लागू करने की मांग की है। पत्र के अनुसार पायलटों के लिए ड्यूटी नियम के कारण उन्हें थकान कम होती है और उड़ान में सुरक्षा बढ़ती है। इसी तरह, रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए भी ड्यूटी घंटा नियम लागू करने से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और चिकित्सा त्रुटियों को कम किया जा सकता है। पत्र में मांग की गई है कि यूनिफॉर्म रेजीडेंसी स्कीम 1992 को लागू करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं और एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए जो सिविल एविएशन ड्यूटी घंटा नियमों के अनुसार अन्य नियमों को बनाने के लिए काम करे। डॉ लक्ष्य मित्तल ने कहा कि 1992 के नियम के अनुपालन संबंधी उत्तरदायित्व सुनिश्चित किये जाएं और लागू न होने पर सजा का प्रावधान हो।
क्या है रेजिडेंट डॉक्टरों के ड्यूटी नियम?
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1992 में यूनिफॉर्म रेजीडेंसी स्कीम बनाई थी। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए 48 घंटे प्रति सप्ताह और एक बार में अधिकतम 12 घंटे ड्यूटी का नियम है। लेकिन अधिकांश मेडिकल कॉलेज इसका पालन नहीं कर रहे हैं। दिल्ली की हेल्थ एक्टिविस्ट डॉ रिशु सिन्हा ने कहा कि 1992 की नियमावली का उल्लंघन करके अधिक काम कराना बीएनएस की धारा 146 के तहत अपराध है। अगर रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के वास्तविक घंटों का रिकॉर्ड न रखा जाता हो तो बीएनएस की धारा 337, 340 और 344 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। नियम के उल्लंघन को आपराधिक दायरे में लाने पर ही मेडिकल स्टूडेंट्स की आत्महत्या और सीट छोड़ने की समस्या का समाधान होगा।
Created On :   7 April 2026 8:27 PM IST












