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Nagpur News: पुराने हाईकोर्ट की मरम्मत मामला ,पीडब्ल्यूडी को सौंपी जा सकती है जिम्मेदारी

Nagpur News पुराने हाईकोर्ट भवन के मरम्मत कार्य में हो रही देरी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट नागपुर खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि, यदि, 31 दिसंबर 2026 तक मरम्मत कार्य पूरा करना संभव नहीं है, तो इसे स्पष्ट रूप से बताया जाए, ताकि यह जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को सौंपी जा सके। मंगलवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष एएसआई ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताने के बाद बाद अदालत ने राज्य सरकार को यह कार्य पीडब्ल्यूडी को सौंपने के संबंध में विचार करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में नागपुर खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दायर की थी।
अदालत के प्रस्ताव पर एएसआई सहमत : सुनवाई के दौरान एएसआई ने कोर्ट के प्रस्ताव पर सहमति जताई, लेकिन शर्त रखी कि, भवन संरक्षित स्मारक होने के कारण इसके संरक्षण संबंधी कार्य उसके नियमों के अनुसार ही किए जाएं और वह कार्य की निगरानी करेगा। अदालत ने शर्त को स्वीकार कर लिया। पश्चात अदालत ने राज्य सरकार को मौखिक निर्देश दिए कि, वह इस कार्य को पीडब्ल्यूडी को सौंपने के संबंध में विचार करे। मामले में न्यायालय मित्र के रूप में एड. आशुतोष धर्माधिकारी ने सहायता की, केंद्र सरकार की ओर से एड. मुग्धा चांदूरकर और राज्य सरकार की ओर से एड. दीपक ठाकरे ने पैरवी।
ताे कार्यक्षमता पर उठेंगे सवाल : कोर्ट : पुराने हाईकोर्ट भवन के मरम्मत कार्य में पिछले नौ साल से संतोषजनक प्रगति नहीं होने के बावजूद अतिरिक्त समय की मांगने पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि, यदि यह कार्य पीडब्ल्यूडी निर्धारित समय में पूरा कर देता है, तो एएसआई की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। साथ ही यह बात न्यायालय के रिकॉर्ड में स्थायी रूप से दर्ज रहेगी।
Created On :   8 April 2026 1:31 PM IST















