चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कृपा पाने के लिए करें इन मंदिरों का दर्शन, जीवन के हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति

चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कृपा पाने के लिए करें इन मंदिरों का दर्शन, जीवन के हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति
चैत्र नवरात्रि का हर दिन बहुत खास होता है, क्योंकि नौ दिन मां के नौ दिव्य रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के छठे दिन मां के छठवें रूप, मां कात्यायनी, की पूजा होती है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्रि का हर दिन बहुत खास होता है, क्योंकि नौ दिन मां के नौ दिव्य रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के छठे दिन मां के छठवें रूप, मां कात्यायनी, की पूजा होती है।

मां कात्यायनी को शक्ति और भय से मुक्ति का रूप माना जाता है। मां के दर्शन से भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में आ रही बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। आज हम मां कात्यायनी के प्रसिद्ध शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं, जहां दर्शन करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दिल्ली में मां कात्यायनी का प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंदिर मौजूद है, जहां मां कात्यायनी साक्षात अस्त्र और शस्त्र के साथ भक्तों को दर्शन देती हैं। मंदिर दिल्ली के छत्तरपुर में मौजूद है, जहां मेट्रो के जरिए आराम से पहुंचा जा सकता है। खास बात यह है कि मां के दर्शन साल में 12 दिन ही हो पाते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में नौ दिन मां का विशेष दरबार लगता है और बाकी समय दरबार बंद रहता है।

वृंदावन में मां कात्यायनी का 51 शक्तिपीठों में शामिल 'उमा शक्तिपीठ' मंदिर स्थापित है। माना जाता है कि इसी स्थान पर मां सती के केश गिरे थे। स्थानीय मान्यता के अनुसार, वृंदावन की गोपियां ने भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए इसी मंदिर में कठोर तपस्या की थी। यहां मां उमा को मां कात्यायनी का ही दिव्य रूप माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिन मंदिर में मां का विशेष पूजन किया जा जाता है।

बिहार के खगड़िया में मां कात्यायनी धाम है। यह मंदिर भी शक्तिपीठ मंदिरों में शामिल है। माना जाता है कि इस स्थान पर सती की बायीं भुजा गिरी थी। यहां मां को दुधारू पशुओं की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मां कात्यायनी ने सपने में अपने एक भक्त को इसी स्थान पर मंदिर बनाने का आदेश दिया था। भक्त ने पहले मां के लिए मिट्टी के मंदिर का निर्माण करवाया था, लेकिन समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा। नवरात्रि के छठे दिन मां का विशेष शृंगार के साथ बड़े अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है।

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Created On :   23 March 2026 8:06 PM IST

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