विश्व मौसम विज्ञान दिवस: जलवायु परिवर्तन का असर बदल रहा नागपुर का पैटर्न, 2026 की थीम-ऑब्सरविंग टूडे - प्रोटेक्टिंग टूमॉरो

जलवायु परिवर्तन का असर बदल रहा नागपुर का पैटर्न, 2026 की थीम-ऑब्सरविंग टूडे - प्रोटेक्टिंग टूमॉरो
  • 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस
  • मुख्य उद्देश्य समाज और सतत विकास के लिए मौसम, जलवायु और जल सेवाओं के महत्व को उजागर करना

Nagpur News. हर वर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज और सतत विकास के लिए मौसम, जलवायु और जल सेवाओं के महत्व को उजागर करना है। इस मौके पर गौर करने वाली बात यह है कि नागपुर में बीते कुछ वर्षों के दौरान जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। शहर में बेमौसम बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं, सर्दियों की अवधि घटती जा रही है और गर्मी का मौसम पहले से अधिक लंबा महसूस हो रहा है। इसके साथ ही मानसून के आगमन और वर्षा के समय में भी बदलाव देखा जा रहा है। कम समय में अत्यधिक वर्षा होना और आंधी-तूफान, हीटवेव जैसी चरम मौसम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति इस बात का संकेत है कि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

पैटर्न में इस तरह बदलाव

गर्मी - पहले नागपुर में गर्मियों के दौरान शुष्क हवाएं चला करती थीं, लेकिन अब हवाओं में आर्द्रता बढ़ गई है, जिससे उमस भी बढ़ रही है। ताज़ा उदाहरण के तौर पर, मार्च की शुरुआत में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे लोगों को समय से पहले ही तेज गर्मी का अनुभव होने लगा। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में चलने वाली हवाओं के पैटर्न में भी बदलाव आया है और इस वर्ष हीट वेव के दिनों में बढ़ोतरी की संभावना भी दिखाई दे रही है।

बरसात (मानसून)

पहले लगभग 50 से 60 दिन में कमोबेश संतुलित बारिश (850 से 900 मिमी.) होती थी, जो खेती के लिए अनुकूल रहती थी। लेकिन अब इतनी बारिश बहुत कम दिनों में ही हो जाती है। इसके कारण बाढ़ जैसी स्थिति और शहरों में जलभराव की समस्या बढ़ने लगी है।

सर्दी (शीत ऋतु)

पहले सर्दी का मौसम लंबा और अधिक ठंडा होता था, लेकिन अब ठंड के दिनों की संख्या कम हो गई है। यहां तक कि सर्दियों के महीनों में भी तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है।

Created On :   23 March 2026 8:40 PM IST

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