Nagpur News: तीन साल में 2.02 लाख पेड़ों की राज्य में अवैध कटाई, वन विभाग को हुआ 18 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान

तीन साल में 2.02 लाख पेड़ों की राज्य में अवैध कटाई, वन विभाग को हुआ 18 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान
  • सागौन की तस्करी ने बढ़ाई चिंता
  • अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का आधार
  • वनोपज से चलती है हजारों घरों की रसोई

Nagpur News. महाराष्ट्र के हरे-भरे जंगलों पर तस्करों और अवैध कटाई करने वालों की नजर लग गई है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े डराने वाले हैं। राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों से 2 लाख 2 हजार से अधिक पेड़ अवैध रूप से काट दिए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा निशाना बेशकीमती सागौन के पेड़ों को बनाया गया है, जिनकी संख्या 77,600 से अधिक है। इस अवैध कटाई के कारण वन विभाग को 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगी है।

सागौन की तस्करी ने बढ़ाई चिंता

जंगलों की इस कटाई में सागौन के पेड़ों का बड़े पैमाने पर शामिल होना वन विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। साल-दर-साल अवैध कटाई का ग्राफ गिरता नहीं दिख रहा। वर्ष 2023 में 68,000 से अधिक पेड़ों की कटाई हुई, वर्ष 2024 में 68,300 से अधिक पेड़ काटे गए (जिसमें 26,600 सिर्फ सागौन के थे), वर्ष 2025 में 65,000 से ज्यादा पेड़ों की बलि चढ़ी (जिसमें 25,000 सागौन के पेड़ शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि, वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए काटे गए पेड़ों में से लगभग 15 करोड़ रुपए की लकड़ी जब्त कर ली है, लेकिन पर्यावरणविदों का कहना है कि, लकड़ी जब्त होने से जंगल की भरपाई नहीं होती, इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटना नागपुर और आस-पास के वन्यजीवों के आवास के लिए बड़ा खतरा है।

अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का आधार

महाराष्ट्र का लगभग 18.5% भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें विदर्भ और नागपुर विभाग की भूमिका अहम है। यहां के जंगल न केवल पेंच, नवेगांव-नागझिरा और उमरेड-करहंडला जैसे अभयारण्यों के कारण प्रसिद्ध हैं, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं।

वनोपज से चलती है हजारों घरों की रसोई

नागपुर के जंगलों से मिलने वाले उत्पाद जैसे तेंदू पत्ता, महुआ, लाख, चारोली और हिरड़ा-बहेड़ा स्थानीय आदिवासी समुदायों की आय का मुख्य स्रोत हैं। यहां लाखों टन तेंदू पत्तियों का संग्रहण होता है। साथ ही, इको-टूरिज्म के बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, लेकिन अवैध कटाई इन संभावनाओं पर पानी फेर रही है।

खतरे में ‘ग्रीन इंडिया मिशन'

एक तरफ सरकार ‘ग्रीन इंडिया मिशन' और विभिन्न राज्य स्तरीय योजनाओं के जरिए वन क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर शहरीकरण और आपराधिक गतिविधियों के कारण जंगल खाली हो रहे हैं। यदि अवैध कटाई पर सख्ती से लगाम नहीं लगाई गई, तो जलवायु परिवर्तन का असर आने वाले समय में और भी भयानक हो सकता है।


Created On :   22 March 2026 7:49 PM IST

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