Nagpur News: मजबूत व सक्षम नेतृत्व के लिए चरित्र निर्माण जरुरी-उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

मजबूत व सक्षम नेतृत्व के लिए चरित्र निर्माण जरुरी-उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
भारतीय युवा संसद परिषद का उदघाटन

Nagpur News जीवन में चरित्र के महत्व को सर्वोपरि ठहराते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि मजबूत व सक्षम नेतृत्व की बुनियाद चरित्र निर्माण पर ही निर्भर है। समृद्ध व विकसित भारत का दायित्व युवाओं पर है। युवाओं के लिए विविध अवसर है। युवाओं से आव्हान है कि चरित्र संपन्न बनकर राष्ट्रविकास में योगदान दें। शनिवार को रेशमबाग स्थित महर्षि व्यास सभागृह में 29 वे भारतीय युवा संसद परिषद के उद्घाटन के अवसर पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रा.श्रीनिवास वरखेडी, भारतीय युवा संसद परिषद के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष जोशी मंच पर थे। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारतीय युवा संसद परिषद केवल चर्चा परिषद नहीं बल्कि जवाबदार नागरिक गढ़ने को प्रभावी माध्यम है। परिषद के माध्यम से विचारों को आकार मिलता है। उन्होंने कहा-किसी भी देश की क्षमता व सामर्थ्य देश की युवा जनसंख्या व उनकी ताकत पर निर्भर रहती है।

भारत में युवाओं की संख्या अधिक है। देश में लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने शिक्षा, कौशल व नेतृत्व विकास के लिए अनेक उपक्रम शुरु किए हैं। भारतीय युवा संसद नेशनल ट्रस्ट दो दशक से अविरत काम कर रहा है। देश के विविध क्षेत्रों में परिषदों का आयोजन किया जा रहा है। स्वतंत्रता के अमृतकाल में 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है। इस मामले में सफलता पाने के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। अधिक मजबूत, सर्वसमावेशक व समृद्ध भारत निर्माण के लिए चरित्र व नेतृत्व के बल पर युवाओं को काम करना होगा।

सामाजिक व सांस्कृतिक योगदान का महत्व : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि विकसित भारत के लिए सामाजिक व सांस्कृति योगदान महत्वपूर्ण है। युवा पीढ़ी देश की ताकत है। उत्साही व गतिमान पीढी राष्ट्र निर्माण में योगदान देगी। 2047 तक विकसित भारत साकार करने को लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहेगा। विविधता में एकता भारत की विशेषता है। भाषा, धर्म, जाति, पंथ अलग अलग है। लेकिन देश एकत्रित है। अब तक भारत पर अनेक आक्रमण हुए लेकिन यह देश एकत्रित व एकजुट रहा। आक्रमण विफल हुए। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा संसद परिषद नियोजन व अनुशासन सिखाती है। इस परिषद में राष्ट्रनिर्माण की चर्चा की जा रही है। वर्तमान स्क्रीन टाइम के दौर में यह फलदायी चर्चा महत्वपूर्ण साबित होगी।


Created On :   21 March 2026 7:03 PM IST

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