मंडे पॉजिटिव: अनाथालय से निकले सितारे, कोई डॉक्टर तो कोई बना इंजीनियर, इनका जीवन सभी को प्रेरणा देगा

अनाथालय से निकले सितारे, कोई डॉक्टर तो कोई बना इंजीनियर, इनका जीवन सभी को प्रेरणा देगा
  • पुलिस ने किया रेस्क्यू, इसलिए बनी पुलिस
  • ईंट भट्ठी से एमबीबीएस तक

Nagpur News. रितु वासनिक| शहर में महिला व बालविकास विभाग द्वारा संचालित 13 बालगृह न केवल अनाथ, निराधार और बेघर बच्चों को आश्रय दे रहे हैं, बल्कि उनके टूटे हुए सपनों को फिर से संवारने का काम भी कर रहे हैं। यहां भोजन, शिक्षा, काउंसलिंग और सुरक्षित वातावरण मिलता है। जिनके माता-पिता की पहचान नहीं हो पाती, उन्हें ऑर्फन सर्टिफिकेट देकर शिक्षा और नौकरी में 1 प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी दिया जाता है। हर साल सैकड़ों बच्चों कोआत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है, लेकिन इन आंकड़ों के पीछे छुपी कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं। संघर्ष, दर्द और फिर सफलता की मिसाल बनने तक का सफर।

पुलिस ने किया रेस्क्यू...इसलिए बनी पुलिस

मुझे बचपन ठीक से याद नहीं, बस इतना याद है कि मैं शायद 6 से 10 साल की रही होऊँगी, जब स्टेशन पर किसी तरह गुजारा करती थी। एक दिन रेलवे पुलिस ने रेस्क्यू कर अनाथालय पहुंचा दिया। मैं बहुत डर गई थी, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। मुझे सहारा मिला, प्यार मिला, दो वक्त का खाना मिला और सबसे बड़ी बात, जीने का एक आधार मिला। तब मुझे मेरा असली नाम तक नहीं पता था। शायद जिन्होंने मुझे ढूंढा, उन्होंने ही मेरा नाम बबली सलीम शेख रखा। संस्था के माध्यम से 12वीं तक पढ़ाई पूरी की। 2017-19 में राष्ट्रीय स्तर की ऊँची कूद प्रतियोगिता में कई पुरस्कार भी जीते। 18 साल की हुई (2021), तो संस्था बदलने की बात सामने आई। तब मैडम ने मुझे नर्सिंग की सलाह दी। कोर्स के लिए पुणे गई और सांगली में इंटर्नशिप भी पूरी की, लेकिन मेरा सपना पुलिस बनने का था। मैंने अकादमी में प्रशिक्षण लिया। आखिरकार 2022-23 में मेरा चयन पुलिस कॉन्स्टेबल के पद पर हुआ। आज मैं मुंबई सेंट्रल कारागार में कार्यरत हूँ।


ईंट भट्ठी से एमबीबीएस तक

मेरी पढ़ाई सरांडी की प्रगति आश्रम शाला से शुरू हुई। 9वीं कक्षा में थी, तब माँ का निधन हो गया। पिता पहले से नहीं थे। मैं अकेली हो गई। हालात इतने कठिन थे कि मैंने ईंट भट्ठे पर काम करने का मन बना लिया था, लेकिन शिक्षकों ने हिम्मत दी। मैंने 10वीं में 78.80% अंक हासिल किए। अनाथ आश्रम में रहकर 12वीं तक पढ़ी। डॉक्टर बनने का सपना तो था, लेकिन हालात के कारण बीएसडब्ल्यू में प्रवेश लिया। रोज़ 4 किलोमीटर पैदल कॉलेज जाना, 900 रुपए में पूरा महीना निकालना, और साथ में छोटे-मोटे काम करके पढ़ाई जारी रखना मेरी दिनचर्या बन गई थी। 2019 में एक एक्सीडेंट में पैर टूट गया, लेकिन हार नहीं मानी। आश्रम छोड़कर नौकरी करते हुए पढ़ाई जारी रखी। बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ यू-ट्यूब के सहारे तैयारी की और 2022 में पहले ही प्रयास में आईजीजीएमसी, नागपुर में एमबीबीएस में प्रवेश हासिल किया। अभी फाइनल ईयर में हूँ। मेरा सपना है कि मैं एम्स में डॉक्टर बनूं और जरूरतमंद छात्रों की मदद करूं।

अनाथालय से मंत्रालय तक

जब मैं सिर्फ 3 साल का था, तब पिता का निधन हो गया। मेरा और मेरे जुड़वां भाई प्रीतम संजय चापले की कुछ समय तक परवरिश दादी ने की, बाद में दोनों भाइयों को अनाथ आश्रम में रहना पड़ा। मेरी प्रारंभिक शिक्षा श्री साई शिक्षण संस्था से शुरू हुई। कई कठिनाइयां आईं, लेकिन हार नहीं मानी। 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की और इंजीनियर बनने का सपना देखा। हम पुणे गए और समाज कल्याण विभाग के हॉस्टल में रहने लगे। तभी लॉकडाउन लग गया और हॉस्टल बंद हो गया। हम फिर दादी के पास लौट आए, लेकिन वहां भी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। एक बार फिर ऐसा लगा जैसे हम अनाथ हो गए हों। इसके बावजूद मैंने और मेरे भाई ने मेहनत नहीं छोड़ी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। मुझे परभणी में जलसंपदा विभाग में कैनाल इंस्पेक्टर के पद पर नौकरी मिली। इसके बाद भी मैंने प्रयास जारी रखा, और आज मेरा चयन मंत्रालय में सहायक प्रकल्प अधिकारी के रूप में हुआ है, जिसकी जॉइनिंग आज (सोमवार) से है। मेरा जुड़वां भाई आज मुंबई में इंजीनियर के रूप में कार्यरत है।



मौजूदा स्थिति :

  • बालगृह- 13
  • कुल बच्चे - 450
  • शासन संचालित 4
  • प्राइवेट एनजीओ द्वारा संचालित 9
  • सपनों को उड़ान देने की कोशिश

सुनील मेसरे, जिला महिला व बालविकास अधिकारी ने बताया कि अनाथ और निराधार बच्चों को शिक्षा में 1 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

भविष्य संवारने का है प्रयास


मुश्ताक पठान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मुताबिक विभाग का प्रयास सिर्फ बच्चों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें बड़े पदों तक पहुंचाना है। सफल बच्चे हर साल आश्रम लौटकर अन्य बच्चों को प्रेरित भी करते हैं।


Created On :   23 March 2026 6:51 PM IST

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