सीएम योगी के 'हनुमानगढ़ी में नमाज' वाले बयान पर सियासत, अयोध्या के संतों ने किया समर्थन

सीएम योगी के हनुमानगढ़ी में नमाज वाले बयान पर सियासत, अयोध्या के संतों ने किया समर्थन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ऐसा करता था, जबकि उनकी सरकार राम नगरी अयोध्या के विकास में जुटी है। मुख्यमंत्री योगी के इस बयान पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। अयोध्या के कई प्रमुख संतों और महंतों ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए इसे सनातन परंपरा, धार्मिक मर्यादा और अयोध्या के विकास से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी।

अयोध्या, 10 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ऐसा करता था, जबकि उनकी सरकार राम नगरी अयोध्या के विकास में जुटी है। मुख्यमंत्री योगी के इस बयान पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। अयोध्या के कई प्रमुख संतों और महंतों ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए इसे सनातन परंपरा, धार्मिक मर्यादा और अयोध्या के विकास से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी।

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगत गुरु परमहंस दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी सनातनियों को मुख्यमंत्री की बात सुननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी, जबकि आज मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में प्रदेश में रामराज्य की स्थापना हुई है।

रामराज्य का अर्थ यही है कि कानून सबके लिए समान हो। अपराधी चाहे सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का, यदि वह दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वर्तमान सरकार में दोषियों को दंड मिल रहा है और रामराज्य की यही पहचान है।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मुजफ्फर नगर दंगों के समय वह मुख्यमंत्री थे और उस दौरान एकतरफा मुआवजा वितरण किया गया, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने अखिलेश यादव के गोशालाओं को लेकर दिए गए पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्हें गोशाला से बदबू आती हो, वे रामराज्य की भावना को नहीं समझ सकते।

वहीं, संत जगद्गुरु राम दिनेश आचार्य ने कहा कि सनातन धर्म का हृदय अत्यंत विशाल है और भारत ने सभी धर्मों एवं पंथों को सम्मानपूर्वक जीने का अवसर दिया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने का अधिकार है और किसी दूसरे धर्म की मर्यादा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद न केवल हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा मजबूत हुई है, बल्कि सभी समुदायों को अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की स्वतंत्रता मिली है। प्रदेश में धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और भौतिक विकास भी तेजी से हुआ है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।

महामंडलेश्वर गिरीश दास ने भी मुख्यमंत्री के बयान को उचित ठहराते हुए कहा कि जिस प्रकार मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ नहीं हो सकता, उसी प्रकार मंदिरों में भी किसी अन्य धर्म की धार्मिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना चाहिए और दूसरे धर्म के पूजा स्थलों की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है वह पूरी तरह सही है। उनके नेतृत्व में अयोध्या निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। आज अयोध्या दिव्य, भव्य और आधुनिक स्वरूप में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए तैयार है और इसका सबसे बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है।

अयोध्या धाम सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने भी मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे पूरी तरह उनके साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सनातन परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान दिए गए और राम मंदिर तथा अयोध्या को लेकर नकारात्मक राजनीति की गई। जो लोग आज राम पर टिप्पणी कर रहे हैं, वे स्वयं कभी राम मंदिर दर्शन के लिए नहीं आए और न ही अपने नेताओं को आने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों पर बयान देते हैं और प्रदेश के विकास को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। अयोध्या के विकास और राम मंदिर निर्माण के बाद हिंदू समाज सब कुछ समझ चुका है और अब ऐसे बयानों का प्रभाव नहीं पड़ने वाला।

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Created On :   10 July 2026 5:16 PM IST

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