कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर प्रस्ताव पारित

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर प्रस्ताव पारित
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इस इस्तीफे के अलावा देश में एसआईआर पर रोक, वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को वापस जोड़ने की मांग भी रखी गई।

नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इस इस्तीफे के अलावा देश में एसआईआर पर रोक, वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को वापस जोड़ने की मांग भी रखी गई।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति ने देश के लोकतंत्र के समक्ष उत्पन्न उस गंभीर खतरे पर विचार-विमर्श किया, जो हालिया रिपोर्टों से सामने आया है। इससे ये साफ हो जाता है कि भारत निर्वाचन आयोग के मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से संघ-भाजपा ने संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया है। इन खुलासों से राहुल गांधी द्वारा लगातार व्यक्त की जा रही आशंकाओं की पुष्टि होती है। साथ ही, उन्होंने 'वोट चोरी' के माध्यम से भारत की चुनावी प्रक्रिया को सुनियोजित ढंग से कमजोर किए जाने की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने लगातार आदर्श आचार संहिता के चुनिंदा और पक्षपातपूर्ण ढंग से लागू किए जाने, ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों, मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से नाम जोड़ने और हटाने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की बदली हुई प्रक्रिया तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को आजीवन कानूनी संरक्षण दिए जाने जैसे मुद्दों को उठाया है।

कांग्रेस कार्यसमिति इस बात को भी गंभीरता से लेती है कि भारत में चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं हालिया रिपोर्टों के बाद और गहरी हुई हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि निर्वाचन आयोग को एक व्यक्ति के नियंत्रण वाली संस्था में तब्दील कर दिया गया है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त अन्य निर्वाचन आयुक्तों से उचित परामर्श किए बिना निर्णय ले रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दो निर्वाचन आयुक्तों ने दस महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज की और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर में प्रयुक्त फॉर्म- 6 में किए गए बदलावों को अनधिकृत और अवैध बताया। यह संस्थागत अधिकारों के अतिक्रमण के एक पैटर्न को उजागर करता है। देशव्यापी एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों पर नियंत्रण को भाजपा समर्थित कुछ अधिकारियों के हाथों में अभूतपूर्व रूप से केंद्रित किया जाना निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता के ताबूत में आखिरी कील साबित हो रहा है।

प्रस्ताव में आगे कहा गया कि कांग्रेस कार्यसमिति एसआईआर की संवैधानिक वैधता को लेकर बढ़ते गंभीर सवालों से अत्यंत चिंतित है, जिसके कारण अब तक 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। ऐसी प्रक्रिया जिसमें नागरिकों पर अपनी पात्रता स्वयं साबित करने का भार डाल दिया जाता है, जिसे बिना पारदर्शी सुरक्षा उपायों के जल्दबाजी में लागू किया जाता है और जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मनमाने ढंग से लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जाता है, उसे संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता की गारंटी अथवा अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत के साथ संगत नहीं माना जा सकता।

ऐसी कवायद, जिसकी संवैधानिक वैधता ही संदिग्ध हो, उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में यह तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि कौन मतदान कर सकता है। मल्लिकार्जुन खड़गे के मार्गदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पहले ही इस लड़ाई को जनता के बीच और हर उपलब्ध मंच पर ले जा चुकी है। बिहार में वोटर अधिकार यात्रा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाता सूचियों में हेरफेर को उजागर करने वाली उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देशव्यापी 'वोट चोरी' अभियान, संसद में इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन तथा निर्वाचन आयोग तक मार्च। जो शुरुआत में एक व्यक्ति की अकेली चेतावनी थी, वह अब पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय मांग बन चुकी है।

कांग्रेस कार्यसमिति यह मानती है कि जिस बात को कभी राहल गांधी का अकेला दृढ़ विश्वास माना जाता था, वह अब देशव्यापी जवाबदेही, पारदर्शिता और भारत की चुनावी व्यवस्था की पवित्रता बहाल करने की मांग बन चुकी है।

कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मांग की गई कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। एसआईआर के माध्यम से तैयार की जा रही मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता तथा एसआईआर की संवैधानिक वैधता को लेकर गंभीर चिंताओं के मद्देनजर एसआईआर को तत्काल निलंबित किया जाए। मतदाता सूचियों से हटाए गए 13.30 करोड़ नामों को तत्काल बहाल किया जाए।

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Created On :   29 Sept 2026 4:28 PM IST

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