दवा घोटाले की जांच के बाद एसीबी चीफ के तबादले पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

दवा घोटाले की जांच के बाद एसीबी चीफ के तबादले पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एसीबी के चीफ एवं जॉइंट सीपी विक्रमजीत सिंह का कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादला किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में सामने आए 650 करोड़ रुपए के दवा और चिकित्सा उपकरण घोटाले की जांच के बीच एसीबी प्रमुख का तबादला कई सवाल खड़े करता है।

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एसीबी के चीफ एवं जॉइंट सीपी विक्रमजीत सिंह का कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादला किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में सामने आए 650 करोड़ रुपए के दवा और चिकित्सा उपकरण घोटाले की जांच के बीच एसीबी प्रमुख का तबादला कई सवाल खड़े करता है।

भारद्वाज ने सवाल किया कि क्या दवा घोटाले की ईमानदारी से जांच करने की वजह से एसीबी प्रमुख को तबादले के रूप में सजा दी गई है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विक्रमजीत सिंह का कार्यकाल अभी आधे से भी अधिक बचा हुआ था, इसके बावजूद उन्हें अचानक स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले ही एसीबी ने इस मामले में करीब 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी और इसके तुरंत बाद एसीबी चीफ का तबादला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यदि दवा घोटाले की जांच को और गहराई से आगे बढ़ाया गया तो भाजपा सरकार से जुड़े कई बड़े लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की जांच को सीमित रखने के लिए एसीबी पर दबाव बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि, ये आरोप सौरभ भारद्वाज ने लगाए हैं और उन्होंने इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या दस्तावेज सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किए। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पहले भी दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस मामले में राजीव रंगीला को कथित तौर पर मुख्य भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बताया जा रहा है। उनके अनुसार, आरोप है कि फर्जी और शेल कंपनियां बनाई गईं और उन्हीं कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर की शर्तें तय की गईं। सौरभ भारद्वाज ने खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के कई उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 150 रुपये की चादर 450 रुपये में खरीदी गई, 2.5 रुपये की कीमत वाले ओआरएस की खरीद 15 रुपये में की गई और करीब 10 लाख रुपये में मिलने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन 33 लाख रुपए में खरीदी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि दो मशीनों के लिए टेंडर किए जाने के बावजूद 448 मशीनों की खरीद की गई।

उन्होंने दवाओं की खरीद को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। भारद्वाज के मुताबिक, करीब 100 करोड़ रुपए की दवाएं 400 करोड़ रुपए में खरीदी गईं, लेकिन कथित तौर पर ये दवाएं अस्पतालों तक पहुंची ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में और भी कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं और जांच में इनकी विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।

आप नेता ने आरोप लगाया कि इतने बड़े मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद इसकी पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कथित एक्साइज मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन मामलों में आरोपों को राजनीतिक रूप से ज्यादा प्रचार मिला, उनकी व्यापक चर्चा हुई, जबकि 650 करोड़ रुपये के कथित दवा घोटाले में चार्जशीट दाखिल होने की खबर अपेक्षाकृत दब गई।

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर खबरों को दबाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि इससे भाजपा सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में क्या हुआ, किसकी जिम्मेदारी तय हुई और जांच में अब तक क्या सामने आया है। उन्होंने एसीबी प्रमुख के तबादले और चार्जशीट दाखिल होने के बीच के घटनाक्रम पर भी सवाल उठाते हुए मामले की जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है तो जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के उसकी तह तक जाना चाहिए।

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Created On :   22 Sept 2026 7:49 PM IST

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