दिलीप घोष बोले- 'टीएमसी के पागलपन के कारण खराब हुई बंगाल की आर्थिक स्थिति', चंद्रिका भट्टाचार्य पर भी उठाए सवाल

दिलीप घोष बोले- टीएमसी के पागलपन के कारण खराब हुई बंगाल की आर्थिक स्थिति, चंद्रिका भट्टाचार्य पर भी उठाए सवाल
चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में सभी पदों से इस्तीफे पर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की खराब आर्थिक स्थिति टीएमसी के पागलपन और गलत शासन-व्यवस्था का नतीजा है। इसके साथ ही, दिलीप घोष ने चंद्रिका भट्टाचार्य पर भी सवाल उठाए।

कोलकाता, 5 जुलाई (आईएएनएस)। चंद्रिमा भट्टाचार्य के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में सभी पदों से इस्तीफे पर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की खराब आर्थिक स्थिति टीएमसी के पागलपन और गलत शासन-व्यवस्था का नतीजा है। इसके साथ ही, दिलीप घोष ने चंद्रिका भट्टाचार्य पर भी सवाल उठाए।

मंत्री दिलीप घोष ने अपने बयान में कहा, "चंद्रिमा भट्टाचार्य इतने सालों तक वित्त मंत्री रहीं, फिर भी अब वह दावा कर रही हैं कि उन्हें पता ही नहीं था कि बजट कैसे तैयार किया जाता है। तो फिर वह वहां क्यों बैठी थीं? क्या बजट उनसे बिना सलाह-मशविरा किए तैयार किया जा रहा था? ममता बनर्जी ने खुद कहा था कि उन्होंने ट्रेडमिल पर बजट तैयार किया। क्या बजट ऐसे बनता है? यह बिल्कुल पागलपन है। पश्चिम बंगाल की मौजूदा खराब आर्थिक स्थिति ऐसी ही शासन-व्यवस्था का नतीजा है।"

उन्होंने कहा कि आज जब पार्टी खत्म हो गई है, तो वह भागकर आ रही हैं और अच्छी बातें कर रही हैं। दिलीप घोष ने सवाल किया, "चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पहले क्यों आवाज नहीं उठाई? आपको लोगों ने चुनकर भेजा था। जब पिछली सरकार में सब उल्टा हो रहा था, तब वहां क्यों रुकीं और क्यों आवाज नहीं उठाई?"

बता दें कि ममता बनर्जी की बेहद करीबी और 'राइट हैंड' मानी जाने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बीते दिन टीएमसी पार्टी से बगावत की। टीएमसी में सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद भट्टाचार्य ने बागी गुट को ज्वाइन किया। वह ममता सरकार में वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चुकी हैं, लेकिन इस्तीफे के बाद कभी आरोप लगाए।

उन्होंने अपने एक बयान में कहा, "वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा में हर साल राज्य बजट पेश करने के बावजूद, बजट तैयार करने में उनसे कभी सलाह नहीं ली गई और न ही उन्हें इसमें शामिल किया गया।"

वहीं, मंत्री दिलीप घोष ने ग्राम पंचायत प्रधानों के मुद्दे पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में कम से कम 2,000 ग्राम पंचायत प्रधान या तो ऑफिस नहीं आ रहे हैं, या फरार हो गए हैं या फिर निष्क्रिय हैं। नतीजतन, सरकारी योजनाओं को लागू करने और प्रशासनिक कामकाज में समस्या हो रही है।"

ग्राम पंचायत प्रधानों से अपील करते हुए दिलीप घोष ने कहा, "आप चुनकर आए हैं और जनप्रतिनिधि हैं। आपको सरकार वेतन देती है। लोगों की जिम्मेदारी आप पर है, लेकिन उन्हें सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा है। लोगों के काम नहीं हो रहे हैं। इसलिए आपको आगे आकर काम करना चाहिए। किसी भी समस्या को हम खुद देखेंगे, लेकिन आप आगे नहीं आएंगे तो फिर आपको खुद बड़ी समस्या से जूझना पड़ सकता है।"

उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में जो भ्रष्टाचार हुआ है, उसकी जांच की जा रही है। जिसके पास भी सबूत हैं, उसे पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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Created On :   5 July 2026 12:02 PM IST

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