ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामलाः हाई कोर्ट ने समय मांगने पर राज्य सरकार पर लगाया आठ हजार का जुर्माना

ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामलाः हाई कोर्ट ने समय मांगने पर राज्य सरकार पर लगाया आठ हजार का जुर्माना
झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया। सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने यह आदेश दिया। जुर्माने की राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के अकाउंट में जमा करनी होगी।

रांची, 2 नवंबर (आईएएनएस)। झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया। सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने यह आदेश दिया। जुर्माने की राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के अकाउंट में जमा करनी होगी।

इससे पहले पिछली सुनवाई में प्रतिवादी संख्या दो पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। अदालत ने समय देते हुए उन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। इस तरह मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने पर राज्य सरकार और हेमंत सोरेन, दोनों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।

ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य की ओर से यह याचिका दाखिल की गई है। इसमें हेमंत सोरेन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है। ईडी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। मामला 31 जनवरी 2024 का है। उस दिन हेमंत सोरेन ने रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने को कहा था। इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित आवास पर बिना पूर्व सूचना के तलाशी ली गई। सोरेन ने आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मीडिया के जरिए उनके खिलाफ भ्रम फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। इसके बाद ईडी अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी को निरस्त करने और उसके आधार पर पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने पहले अधिकारियों के खिलाफ जारी पुलिस नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

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