ज्ञानवापी विवाद पर मध्यस्थता बैठक, हिंदू पक्ष ने कहा- 'यह मंदिर है, हमें सौंपा जाए'

ज्ञानवापी विवाद पर मध्यस्थता बैठक, हिंदू पक्ष ने कहा- यह मंदिर है, हमें सौंपा जाए
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता बैठक से पहले हिंदू पक्ष के सदस्य 'हर-हर महादेव' के नारे लगाते हुए कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर हो रही यह बैठक वाराणसी कोर्ट के रिक्रिएशन रूम में होने की उम्मीद है, जहां हिंदू और मुस्लिम पक्ष बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करेंगे। कड़ी सुरक्षा के बीच मध्यस्थता प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है।

वाराणसी, 14 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता बैठक से पहले हिंदू पक्ष के सदस्य 'हर-हर महादेव' के नारे लगाते हुए कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर हो रही यह बैठक वाराणसी कोर्ट के रिक्रिएशन रूम में होने की उम्मीद है, जहां हिंदू और मुस्लिम पक्ष बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करेंगे। कड़ी सुरक्षा के बीच मध्यस्थता प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्षकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "आज हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मध्यस्थता में शामिल हो रहे हैं और पूरे उत्साह के साथ ऐसा कर रहे हैं। जिन चार मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे, उनसे जुड़े सभी पक्ष यहां मौजूद हैं। हालांकि, हमारा स्पष्ट मानना ​​है कि इस तरह की मध्यस्थता की कोशिशें आमतौर पर सफल नहीं रही हैं। राम जन्‍मभूमि आंदोलन के दौरान भी यही प्रक्रिया थी।"

हिंदू पक्षकार सीता साहू कहती हैं, "हम यहां आए हैं और कोर्ट के हर निर्देश का पालन कर रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि यह एक मंदिर है। हमारी नजर में एएसआई सर्वे और कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्वे से यह साबित हो चुका है कि यह एक मंदिर है। इसी कारण दूसरा पक्ष पीछे हट रहा है और आगे नहीं आ रहा है। उन्हें आना चाहिए और अगर उन्हें लगता है कि यह हिंदू मंदिर है, तो इसे सौंप देना चाहिए। लेकिन, वे हिचकिचा रहे हैं क्योंकि सबूत हमारे पक्ष में हैं। हम लोग न्‍यायालय के माध्‍यम से भी जीत सकते हैं, सत्‍य की जीत सुनिश्चित है।"

उन्‍होंने कहा कि साक्ष्‍यों और तथ्‍यों के आधार पर हम लोगों की जीत निश्चित है। इसीलिए मुस्लिम पक्षकार पीछे हटते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी वह लोग नहीं पहुंच रहे हैं, सिर्फ वकील को भेज दिया है। हम स‍ब चाहते हैं कि हमारा मंदिर हमें मिल जाए, बाकी किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है। ज्ञानवापी मंदिर को औरंगजेब के द्वारा तोड़ा गया था।

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Created On :   14 July 2026 6:46 PM IST

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