हमारा मजहब अलग पर हमारे पूर्वज एक ही हैं बाबा रामदेव
नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि हमारे मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की चर्चा करते हुए मुसलमानों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं होना चाहिए।
नॉर्थ कैंपस स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वां प्राकट्य महोत्सव “राष्ट्रोत्कर्ष दिवस” के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
समारोह में बाबा रामदेव, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, आचार्य धर्मवीर, आदिशंकराचार्य सनातन सेवा संस्थानम् फाउंडेशन के संदीप गर्ग सहित विभिन्न धर्मसंघों, पीठ परिषदों, आदित्य वाहिनी और आनंद वाहिनी के पदाधिकारी, देश-विदेश से आए संत-महात्मा, विद्वान और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने 2009 के एक कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा, “किसी भी मुसलमान को डरने की जरूरत नहीं है। हमारे मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं।”
उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के गेट पर भी यही संदेश लिखा हुआ है कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। हम सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू हैं। बाबा रामदेव ने कहा, “मुसलमानों को डराया जाता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया तो वे कहां जाएंगे। मैं मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा को अपनाएं। जो अपने पिता का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता। आप अपने पूर्वजों, ऋषि-मुनियों की बात को मानें। दाढ़ी रखें, मूंछ कटाएं, जैसे भी वस्त्र पहनें लेकिन चरित्र अपने पूर्वजों जैसा रखें।”
उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए जोर दिया, “मैं फिर से कहना चाहता हूं कि मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है।” बाबा रामदेव ने गुरुकुल व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि हर घर गुरुकुल होना चाहिए। अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए ताकि वे धर्म के मार्ग से कभी न हटें।
उन्होंने कहा, “हम सभी यहां एकजुट हुए हैं, इसलिए गुरुदेव का जो भी आदेश होगा, उसे मानना होगा। हम भारत को भव्य हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।”
उन्होंने बताया कि देश में 5 लाख से अधिक मंदिर हैं, जिनमें से 500 से 1,000 मंदिर गुरुकुल और गौशाला दोनों चला सकते हैं। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, वैष्णो देवी, बांके बिहारी, सिद्धि विनायक जैसे प्रमुख मंदिर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने हिंदू राष्ट्र निर्माण और सनातन संस्कृति के संरक्षण के संकल्प को दोहराया।
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Created On :   12 July 2026 4:27 PM IST












