हरे-भरे पहाड़ और शांत झील के बीच बसा भीमेश्वर महादेव, सीएम धामी ने की दर्शन की अपील

हरे-भरे पहाड़ और शांत झील के बीच बसा भीमेश्वर महादेव, सीएम धामी ने की दर्शन की अपील
हरे-भले पहाड़ और शांत झील के बीच बसा नैनिताल का प्राकृति 'श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर' आस्था का पवित्र स्थान है। कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में गिने जाने वाले इस स्थान का पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों तरह का बड़ा महत्व है।

उत्तराखंड, 17 अगस्त (आईएएनएस)। हरे-भले पहाड़ और शांत झील के बीच बसा नैनिताल का प्राकृति 'श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर' आस्था का पवित्र स्थान है। कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में गिने जाने वाले इस स्थान का पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों तरह का बड़ा महत्व है।

सोमवार को मंदिर को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया के जरिए मंदिर के पौराणिक मान्यताओं का बखान किया। सीएम धामी ने मंदिर का भव्य वीडियो पोस्ट कर लिखा, "नैनीताल जिले के भोवाली में मौजूद श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर कई भक्तों की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां एक दिव्य शिव लिंगम की स्थापना की थी। महा शिवरात्रि समेत कई त्योहारों पर यहां खास पूजा और रस्में की जाती हैं।

अगर आप श्रावण महीने में नैनीताल जिले में आ रहे हैं, तो भीमेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करें।"

भगवान भोलेनाथ को समर्पित मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां विशेष भीड़ लगती है और भक्त बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर का नाम महाभारत के भीम के नाम पर पड़ा है। स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार भीम अकेले हिमालय की यात्रा पर निकले थे। तभी आकाश से एक दिव्य आवाज आई। आवाज ने कहा, "अगर तुम चाहते हो कि लोग तुम्हें हमेशा याद रखें, तो भक्ति भाव से भगवान शिव का मंदिर बनाओ।"

भीम शिव के सच्चे भक्त थे, इसलिए उन्होंने उसी जगह पहाड़ से शिव मंदिर बना दिया। भीम बहुत ताकतवर थे, उनमें 100 हाथियों जितनी ताकत थी। उन्होंने अपने गदा से पहाड़ तोड़ दिया। वहां से गंगा की धारा निकली और उसी पानी से भीमताल झील बनी। इसके बाद भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की।

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार 17वीं शताब्दी में चंद्र शासक बाज बहादुर चंद ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार या निर्माण कराया था। मंदिर की भव्य संरचना और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों व श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

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Created On :   17 Aug 2026 11:24 AM IST

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