केरल 7.16 करोड़ रुपए में खरीदे गए 224 आईफोन, कई गायब, जांच के आदेश

केरल 7.16 करोड़ रुपए में खरीदे गए 224 आईफोन, कई गायब, जांच के आदेश
केरल के सरकारी अस्पतालों में 7.16 करोड़ रुपए में खरीदे गए 224 आईफोन और फंडस कैमरे अनुपयोगी पड़े हैं, जिनमें से कई फोन कथित तौर पर गायब हैं।

तिरुवनंतपुरम, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के सरकारी अस्पतालों में 7.16 करोड़ रुपए में खरीदे गए 224 आईफोन और फंडस कैमरे अनुपयोगी पड़े हैं, जिनमें से कई फोन कथित तौर पर गायब हैं।

राज्य सरकार चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (वीएसीबी) से जांच कराने का आदेश देगी।

जब कांग्रेस विधायक अबिन वर्की कोडियाट्टू ने इस मुद्दे को उठाया तो स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।

इस जानकारी में पीएम केयर योजना के तहत आपूर्ति किए गए 128 वेंटिलेटर भी शामिल हैं।

अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज को आपूर्ति किए गए दो ऑक्सीजन जनरेटर संयंत्र अपेक्षित मात्रा और दबाव पर ऑक्सीजन का उत्पादन करने में विफल रहे हैं।

जांच के दायरे में आने वाले अधिकांश उपकरण कोविड महामारी के दौरान खरीदे गए थे, जब पिनाराई विजयन की पहली सरकार सत्ता में थी।

हालांकि, यह जांच अन्य अवधियों के दौरान की गई खरीदों को भी कवर करती है।

128 अप्रयुक्त वेंटिलेटर कोट्टायम, मंजरी, कन्नूर और कोझिकोड के मेडिकल कॉलेजों में हैं।

सरकार ने गुणवत्ता, परिचालन विश्वसनीयता और रखरखाव लागत को लेकर चिंता जताई है।

अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) द्वारा आपूर्ति किए गए दो ऑक्सीजन जनरेटर संयंत्र पूरी तरह से चालू नहीं किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष टीम नियुक्त की है जो उपकरणों की गुणवत्ता, खरीद की आवश्यकता, स्थापना में विफलताओं और लंबे समय तक उपयोग न होने के कारणों की जांच करेगी।

मेडिकल कॉलेजों से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी हैं और उनकी जांच की जा रही है।

वायनाड और एर्नाकुलम में स्वास्थ्य विभाग के संस्थानों में भी अप्रयुक्त उपकरण पाए गए हैं।

मुरलीधरन ने कहा कि चिकित्सा उपकरणों पर खर्च किया गया सार्वजनिक धन व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता।

सरकार अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

सरकार उपयोगी उपकरणों को उन अस्पतालों में पुनर्वितरित करने पर भी विचार कर रही है जहां उनकी आवश्यकता है।

सरकार के पास जैव चिकित्सा उपकरण रखरखाव कार्यक्रम और जिला स्तरीय निगरानी तंत्र हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए निर्मित महंगे उपकरणों की खरीद संबंधी निर्णयों, स्थापना विफलताओं और लंबे समय तक अनुपयोग को लेकर बढ़ते सवालों के बीच प्रस्तावित सतर्कता जांच शुरू की गई है।

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