भास्कर इन्वेस्टिगेशन: 30 हजार रुपए में बन रहे फर्जी किसान!, मध्यप्रदेश के डिंडोरी से महाराष्ट्र तक चल रहा खेल

30 हजार रुपए में बन रहे फर्जी किसान!, मध्यप्रदेश के डिंडोरी से महाराष्ट्र तक चल रहा खेल
  • कृषि जमीन खरीदने के लिए प्रमाणपत्र दिलाने का दावा
  • स्वराज कोऑपरेटिव के नाम पर गोरखधंधे का आरोप
  • संस्था ने दो लोगों से किया किनारा
  • हर महीने 250 से 300 रजिस्ट्रियां कराने का दावा

डिजिटल डेस्क, नागपुर. महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदने के लिए किसान होना अनिवार्य है। इसी नियम का फायदा उठाकर कथित तौर पर फर्जी किसान प्रमाणपत्र बनवाने का खेल चल रहा है। मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले से संचालित इस कथित नेटवर्क के जरिए महज 30 हजार रुपए में किसी व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने और उसके आधार पर महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदने का रास्ता खोलने का दावा किया जा रहा है।

इस मामले में भोपाल निवासी कपिल शर्मा और डिंडोरी निवासी सीमा पाठक की भूमिका सामने आई है। दोनों स्वराज मल्टीपरपज फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव लिमिटेड से जुड़ा होने का दावा करते हैं। हालांकि, संस्था के सीईओ डॉ. जलज सेन ने दोनों को जमीन खरीदने या पैसों के लेनदेन के लिए अधिकृत करने से इनकार किया है। संस्था ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर दोनों से दूरी भी बना ली है।

एक हजार वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री, किसान बनने का दावा

इस कथित खेल में प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का भी सहारा लिए जाने की बात सामने आई है। दावा है कि सहकारी संस्था का सदस्य बनाकर व्यक्ति के नाम पर डिंडोरी में एक हजार वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री कराई जाती है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को किसान प्रमाणपत्र मिलने और महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदने की पात्रता हासिल होने का भरोसा दिया जाता है।


हैरानी की बात यह है कि इतनी छोटी जमीन पर व्यावहारिक रूप से खेती करना मुश्किल है। इसके बावजूद जमीन की रजिस्ट्री के आधार पर किसान बनने का दावा किया जा रहा है। कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति को जमीन की रजिस्ट्री के लिए डिंडोरी जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो भेजने के बाद पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से पूरी प्रक्रिया कराने की बात कही जाती है। इसके लिए 30 से 50 हजार रुपए तक खर्च होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, केवल जमीन की रजिस्ट्री होने से किसी व्यक्ति को स्वतः किसान का दर्जा या महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदने की कानूनी पात्रता मिल जाती है, यह अपने आप में जांच का विषय है।

संस्था के नाम पर जारी प्रस्ताव पर भी सवाल

सीमा पाठक ने 11 मार्च 2026 को डिंडोरी जिले की शाहपुरा तहसील के एसडीओ (राजस्व) को एक ज्ञापन भेजा था। इसमें उन्होंने खुद को स्वराज कोऑपरेटिव का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बताते हुए बोर्ड के एक प्रस्ताव की प्रतिलिपि प्रस्तुत की थी।


1 अप्रैल 2024 के इस कथित प्रस्ताव में सीमा पाठक को सोसाइटी का रेजिडेंट डायरेक्टर नियुक्त किए जाने का उल्लेख था। साथ ही, वृक्षारोपण के उद्देश्य से अपने नाम पर जमीन खरीदने और 4,000 सदस्यों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अधिकृत किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन संस्था के सीईओ डॉ. जलज सेन ने ऐसे किसी प्रस्ताव के पारित होने से इनकार किया है। इससे संस्था के नाम पर जारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता और संबंधित लोगों के अधिकारों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

हर महीने 250 से 300 रजिस्ट्रियां कराने का दावा

इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली समझने के लिए दैनिक भास्कर के संवाददाता ने ग्राहक बनकर सीमा पाठक से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने एक गुंठा जमीन की रजिस्ट्री के लिए 30 हजार रुपए का खर्च बताया। साथ ही, एक साथ 11 लोगों की रजिस्ट्री कराने और भूमि अभिलेख में नाम दर्ज होने की बात कही।


बातचीत के प्रमुख अंश

सवाल : मुझे किसान प्रमाणपत्र बनवाना है।

सीमा पाठक : एक गुंठा जमीन की रजिस्ट्री 30 हजार रुपए में हो जाएगी। एक साथ 11 लोगों की रजिस्ट्री होगी। भूमि अभिलेख में नाम और सातबारा भी हो जाएगा। आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो भेज देना। जमीन खरीदने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी भी लगेगी। डिंडोरी आने की जरूरत नहीं है। मैं यहीं से सब करवा दूंगी।

सवाल : इस प्रमाणपत्र के इस्तेमाल में कोई कानूनी दिक्कत तो नहीं आएगी?

सीमा पाठक : कोई दिक्कत नहीं आएगी। मैं पूरे महाराष्ट्र से हर महीने 250 से 300 रजिस्ट्रियां कराती हूं। पहले मैं खुद अपने नाम पर जमीन लेती हूं, फिर दूसरों के नाम पर करती हूं। किसी को कोई परेशानी नहीं आती।

सीमा पाठक के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, बातचीत से यह सवाल जरूर उठता है कि क्या इस तरीके से जमीन खरीदने और किसान प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है।

'संस्था की ओर से प्लांटेशन करते हैं'

कपिल शर्मा ने भी डिंडोरी में जमीन होने और वृक्षारोपण के लिए रजिस्ट्रियां कराने की बात कही। उनका दावा है कि संस्था के पास डिंडोरी में 150 एकड़ जमीन है, जिसमें से 3,500 वर्गफीट जमीन 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत रजिस्ट्री कराई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अपने निजी नाम पर छोटी जमीन खरीदते हैं और संस्था की ओर से वहां वृक्षारोपण किया जाता है।

कपिल शर्मा ने सीमा पाठक को संस्था का स्टांप वेंडर बताया। उन्होंने महाराष्ट्र में 2,300 एकड़ जमीन होने और नागपुर में भी जमीन लेने का प्रयास करने की बात कही।

संस्था के सीईओ द्वारा संबंधों से इनकार किए जाने के सवाल पर कपिल शर्मा ने कहा कि यदि स्वराज कोऑपरेटिव ने उनसे संबंध समाप्त कर लिए हैं, तो वे किसी दूसरी संस्था के साथ काम कर लेंगे। उन्होंने खुद को मध्यप्रदेश का प्रभारी बताते हुए दावा किया कि संयुक्त बैंक खाते में डॉ. जलज सेन के भी हस्ताक्षर हैं।

हालांकि, कपिल शर्मा के इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


'दोनों को कोई अधिकार नहीं दिया गया'

स्वराज कोऑपरेटिव के सीईओ (स्ट्रेटजी) डॉ. जलज सेन ने कपिल शर्मा और सीमा पाठक को जमीन खरीदने या किसी तरह के आर्थिक लेनदेन के लिए अधिकृत किए जाने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'हमने कपिल शर्मा और सीमा पाठक को ऐसा कोई मैंडेट नहीं दिया है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए भी कोई मंजूरी नहीं दी गई है। हमने शाहपुरा तहसील के एसडीओ (राजस्व) को ई-मेल भेजकर दोनों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है। संस्था ने सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि दोनों को संस्था की ओर से जमीन खरीदने या किसी भी तरह की राशि के लेनदेन के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।'

जांच के घेरे में जमीन की रजिस्ट्री और किसान प्रमाणपत्र

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या छोटी जमीन की रजिस्ट्री के आधार पर महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदने की पात्रता हासिल करने का दावा कानूनी रूप से सही है। इसके साथ ही, संस्था के नाम पर कथित प्रस्ताव जारी करने, हजारों सदस्यों के नाम पर रजिस्ट्री कराने और वृक्षारोपण के नाम पर जमीन खरीदने के दावों की भी जांच जरूरी है।

यदि दस्तावेजों के जरिए गलत जानकारी देकर किसान प्रमाणपत्र हासिल किए जा रहे हैं, तो इससे कृषि भूमि खरीदने संबंधी नियमों के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। फिलहाल, संस्था ने दोनों व्यक्तियों को अधिकृत करने से इनकार किया है और उनके खिलाफ जांच की मांग की है। मामले में संबंधित राजस्व विभाग की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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