बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था बदहाल, अशांति और हिंसा में डूबा प्रांत बलूच कार्यकर्ता

बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था बदहाल, अशांति और हिंसा में डूबा प्रांत  बलूच कार्यकर्ता
मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के सदस्य सम्मी दीन बलूच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान इस समय जल रहा है और प्रांत में कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब हो गई है।

क्वेटा, 10 जुलाई (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के सदस्य सम्मी दीन बलूच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान इस समय जल रहा है और प्रांत में कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब हो गई है।

उन्होंने दावा किया कि जियारत समेत प्रांत के कई इलाके हिंसा और अशांति में डूबे हुए हैं और यह स्थिति अब प्रांतीय राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाकों के साथ-साथ हन्ना उरक इलाके तक फैल गई है।

प्रांत में बिगड़ते हालात के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों की आलोचना करते हुए सम्मी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ''इस गंभीर सुरक्षा संकट के मूल कारणों की समीक्षा करने के बजाय, केंद्र सरकार, उसके कंट्रोल वाला मीडिया, बलूचिस्तान में कठपुतली प्रांतीय सरकार और उसकी सोशल मीडिया ब्रिगेड लगातार बलूच और पश्तून राष्ट्रवादियों, बलूच यकजेहती कमेटी और उसके नेतृत्व और शांतिपूर्ण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अशांति के लिए दोषी ठहराने में लगी है।''

बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि न तो मीडिया, न सिविल सोसायटी और न ही दूसरे संबंधित लोग पाकिस्तानी सरकार को उसकी जनविरोधी नीतियों, सुरक्षा में नाकामी, भ्रष्टाचार, खराब शासन, कानून का राज बनाने में नाकामी और नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा में जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ''इसके उलट, शांति, न्याय और मानवाधिकारों के लिए बोलने वालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में, ऐसी बड़ी नाकामियों को देखते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही मानें और अपने पदों से इस्तीफा दें। फिर भी यहां, जिम्मेदारी लेने के बजाय, दूसरों पर आरोप लगाए जा रहे हैं।''

इस बीच, बीवाईसी ने बलूचिस्तान के ग्वादर जिले के जिवानी के रहने वाले असगर अली के परिवार के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की बदले की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई। पाकिस्तानी सेना पर असगर अली को जबरदस्ती गायब करने का आरोप है।

बीवाईसी ने कहा, ''एक जवान आदमी को जबरदस्ती गायब करना काफी नहीं समझा गया। इसके बजाय, उसके परिवार वालों पर भी लगातार सरकारी दबाव डाला जा रहा है। घरों पर बार-बार छापे मारना, परिवार वालों को परेशान करना, जबरदस्ती दबाव डालकर बयान दिलवाना और आखिर में भारी मशीनरी से घरों को गिराना, बलूच नरसंहार की नीति को जारी रखना है, जिसका मकसद बलूच देश के हर इंसान को सजा देना और बलूच समाज को सामूहिक तकलीफ और दुख में डालना है।''

मानवाधिकार संस्था ने दावा किया कि इलाके में कई दूसरे घरों को भी गिरा दिया गया और इन कामों को इस बात का साफ सबूत बताया कि सामूहिक सजा को आधिकारिक स्टेट पॉलिसी के तौर पर संस्थागत बना दिया गया है।

बीवाईसी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, पाकिस्तानी सेना द्वारा भारी मशीनरी से घरों को जलाने, तोड़ने और गिराने और पूरे बलूचिस्तान में संपत्ति लूटने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

इसमें आगे कहा गया, “किसी भी आम नागरिक को बिना किसी कानूनी वजह या कोर्ट के ऑर्डर के उनके घर से जबरदस्ती निकालना, परिवार के लोगों को चिलचिलाती धूप में खड़ा रहने के लिए मजबूर करना और उनके सामने उनके घर को गिरा देना, सरकार के सबसे बुरे दमन का उदाहरण है।”

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Created On :   10 July 2026 5:16 PM IST

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