बांग्लादेश की जेलों में बढ़ा मौतों का आंकड़ा 8 महीने में 132 कैदियों की मौत, मानवाधिकारों पर उठे सवाल
ढाका, 24 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में हिरासत में मौतें बढ़ती जा रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले साढ़े आठ महीनों में देश भर में कम से कम 132 कैदियों की मौत हो चुकी है, जिससे भीड़भाड़ वाली जेलों, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं और आधिकारिक जवाबदेही पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
आधिकारिक बयानों और मानवाधिकार समूहों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में लगभग रोजाना कैदियों की मौत हो रही है। कुछ दिनों में तो मौतों की संख्या चार तक पहुंच गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन चिकित्सा उपचार और जेल की स्थितियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में जेल जाना सजा के तौर पर आजादी छिनने तक ही सीमित होना चाहिए, लेकिन जिन परिवारों ने अपनों को सलाखों के पीछे खोया है, उनके लिए यह सजा मौत में बदल गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक ढाका के मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र (एएसके) ने जनवरी से अगस्त के बीच 79 कैदियों की मौत दर्ज की है, जिनमें 47 विचाराधीन और 32 सजायाफ्ता कैदी थे। सबसे ज्यादा 44 मौतें अकेले ढाका डिवीजन में हुईं।
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए, प्रेसेंजा ने कहा कि केवल सितंबर के पहले 15 दिनों में ही बीमारियों के कारण कम से कम 10 कैदियों की मौत हुई, जिससे इस साल मरने वालों की कुल संख्या कम से कम 132 हो गई है।
रिपोर्ट में बताया गया कि हिरासत में हुई ताजा मौतों में 54 वर्षीय मोहम्मद रफीकुल इस्लाम और 60 वर्षीय अब्दुर रहीम शामिल हैं, जिनकी सोमवार को ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। एक दिन पहले ढाका सेंट्रल जेल के दो कैदियों, अब्दुल बारेक और अब्दुल माबूद की भी मौत हो गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया, "अलग-अलग आंकड़े रिपोर्टिंग अवधि और स्रोतों में अंतर को दर्शाते हैं, लेकिन व्यापक पैटर्न इस सवाल को खड़ा करता है कि जब कैदी गंभीर रूप से बीमार पड़ते हैं तो क्या होता है, उन्हें कितनी जल्दी इलाज मिलता है और क्या उनके परिवारों को सूचित किया जाता है।"
रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि ये मामले हिरासत में हर मौत की गहन जांच की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
एएसके के वरिष्ठ समन्वयक अबू अहमद फैजुल कबीर ने प्रेसेंजा से बात करते हुए कहा, "कैदी अपनी आजादी खो सकते हैं, लेकिन वे अपनी मानवीय गरिमा और मौलिक अधिकार नहीं खोते।"
कबीर ने जोर देकर कहा कि हिरासत में रखे गए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए राज्य जवाबदेह है, जिसमें विचाराधीन कैदी और सजायाफ्ता कैदी दोनों शामिल हैं।
उन्होंने प्रत्येक मौत की स्वतंत्र जांच की मांग की, जिसमें चिकित्सा उपचार, सुरक्षा व्यवस्था और जेल अधिकारियों की भूमिका की जांच शामिल हो।
ढाका विश्वविद्यालय के समाज कल्याण और अनुसंधान संस्थान के अपराध विज्ञानी और एसोसिएट प्रोफेसर तौहीदुल हक ने जेलों में व्यापक मानवाधिकार चिंताओं का कारण भीड़भाड़, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा और खराब भोजन मानकों को बताया।
प्रेसेंजा ने हक के हवाले से बांग्लादेशी मीडिया खबरर कागोज से बात करते हुए कहा, "इन सभी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के मुद्दे की अनदेखी की जा रही है।"
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Created On :   24 Sept 2026 11:25 PM IST












