पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जंगलों की सुरक्षा के लिए टेक्नोलॉजी आधारित तरीकों का इस्तेमाल करने पर दिया जोर
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित तरीकों पर चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित 'जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन में नवीनतम टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना' विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला में बोलते हुए प्राकृतिक संसाधनों पर डेटा को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।
यह याद दिलाते हुए कि इंसान प्रकृति से ऊपर नहीं हैं और उन्हें प्रकृति के साथ मिलकर रहने की दिशा में काम करके उसका सम्मान करना चाहिए, केंद्रीय मंत्री ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में तेजी लाने के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी को शामिल करने का आह्वान किया, खासकर प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
भूपेंद्र यादव ने इनोवेशन और नवीनतम टेक्नोलॉजी को अपनाने को बढ़ावा दिया, साथ ही स्वदेशी टेक्नोलॉजी और वन कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (आईएसएफआर) तैयार करने के लिए डेटा की बेहतर गुणवत्ता और फील्ड अनुभव को एक मजबूत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) में शामिल करने का आह्वान किया, ताकि यह रिपोर्ट जंगल संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक मजबूत आधार दस्तावेज बन सके।
उन्होंने कहा कि 2035 तक 3.5-4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड-समकक्ष कार्बन सिंक बनाने के भारत के बढ़े हुए लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत संस्थागत क्षमताओं, प्रभावी नीतियों और लोगों व समुदायों की सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ टेक्नोलॉजी इनोवेशन की भी जरूरत होगी।
कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्र हुए, जिनके विषय जंगल की सीमाओं का डिजिटलीकरण, जंगल और पेड़ों के आवरण का आकलन और कार्बन स्टॉक का अनुमान थे। इस कार्यशाला में राज्य वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाया गया, ताकि जंगल और पेड़ों के संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित तरीकों का पता लगाया जा सके।
भूपेंद्र यादव ने जंगल संरक्षण पर समन्वित कार्रवाई को सक्षम करने के लिए संस्थानों के बीच मानकों के एकीकरण का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि क्षतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य स्पष्ट रूप से वृक्षारोपण को संरक्षित करने और हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार करने के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने घटनाओं की आवृत्ति के आधार पर जंगल की आग के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को वर्गीकृत करने और लक्षित रोकथाम रणनीतियों के लिए हॉटस्पॉट की पहचान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) जैव-विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण इकोसिस्टम हैं, और उन्होंने वेटलैंड्स, वनों और घास के मैदानों के बीच उचित संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।
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Created On :   10 Sept 2026 6:09 PM IST












