हरियाणा एडवोकेट जनरल ऑफिस पूरी तरह डिजिटल, प्रशासनिक सुधारों में बड़ा कदम
चंडीगढ़, 7 मई (आईएएनएस)। प्रशासनिक और कानूनी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, हरियाणा के एडवोकेट जनरल का ऑफिस अब पूरी तरह से डिजिटलाइज हो गया है।
एडवोकेट जनरल प्रविंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में, हरियाणा पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां ऑफिस के सभी कानूनी काम पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम के जरिए किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने कहा कि इस उपलब्धि को न केवल हरियाणा के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नया पैमाना माना जा रहा है।
गुरुवार को एडवोकेट जनरल ने आधिकारिक तौर पर 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' को लाइव लॉन्च किया, जो डिजिटल कानूनी प्रशासन के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।
डिजिटल बदलाव का यह सफर लगभग छह महीने पहले शुरू हुआ था, जब एडवोकेट जनरल चौहान ने सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल अरुण तेवतिया को सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी (सुरक्षा नोडल अधिकारी) और कम्प्यूटरीकरण का चेयरमैन नियुक्त किया था।
उन्हें ऑफिस के सभी मैन्युअल कामों को डिजिटल प्रक्रियाओं में बदलने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद, मिशन मोड में काम शुरू किया गया, जिससे ऑफिस के पारंपरिक कामकाज को एक आधुनिक डिजिटल सिस्टम में बदल दिया गया।
एडवोकेट जनरल ने कहा कि यह सपना अब पूरी तरह से पूरा हो गया है। इस डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ 'प्रो-केस मैनेजमेंट सिस्टम' है, जो 'लिटिगेशन मैनेजमेंट सिस्टम' का एक उन्नत विस्तार है।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए, एडवोकेट जनरल के ऑफिस और सरकारी विभागों के बीच जांच-पड़ताल, कानूनी राय, केस से जुड़ा पत्राचार और मुकदमों का प्रबंधन अब पूरी तरह से डिजिटल तरीके से किया जा रहा है। इससे काम की गति में काफी तेजी आई है और अनावश्यक देरी कम हुई है।
उन्होंने कहा कि केस से जुड़े सभी दस्तावेज, जिनमें पेपर बुक, जवाब, लिखित बयान और अदालत के पिछले आदेश शामिल हैं, अब 'पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट' (पीडीएफ) में सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है, जबकि पारदर्शिता, कार्यक्षमता और पहुंच में सुधार हुआ है।
सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रोस्टर के जरिए, कानून अधिकारियों को पेपर बुक, जवाब और अदालत के अंतिम आदेश सीधे उनके अकाउंट में तुरंत मिल जाएंगे।
इलेक्ट्रॉनिक फैसलों से अदालत के फैसलों और आदेशों तक तुरंत पहुंच मिलेगी, और इलेक्ट्रॉनिक जांच-पड़ताल से कानूनी जांच और समीक्षा की प्रक्रियाएं तेज और आसान हो जाएंगी। इलेक्ट्रॉनिक राय के जरिए, विभागों को कानूनी सलाह ज्यादा तेजी से मिलेगी।
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Created On :   7 May 2026 9:09 PM IST











