'आरोपी अधिकारी को महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती', केरल हाई कोर्ट का सवाल
कोच्चि, 30 जुलाई (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। सरकार ने काजू विकास निगम के कथित 600 करोड़ रुपए के घोटाले में मुकदमे का सामना कर रहे एक सीनियर नौकरशाह को अहम सरकारी पदों पर बनाए रखा था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में आरोपी अधिकारी को महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता केएम शाहजहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ए. बदहर की बेंच ने सरकार को चार हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। बेंच ने सीबीआई केस के मुख्य आरोपी डॉ. केए रतीश के केरल खादी बोर्ड के सेक्रेटरी, केरल स्टेट रुड्रोनिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और केरल खादी वर्कर्स वेलफेयर फंड बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर बने रहने पर गंभीर चिंता जताई।
अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, "क्या सरकार ने भ्रष्टाचार के इतने बड़े आरोपी को तीन महत्वपूर्ण संस्थानों का प्रमुख नियुक्त किया है?" साथ ही यह भी कहा कि इन पदों पर भ्रष्टाचार की काफी गुंजाइश है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रतीश पर लगे आरोप गंभीर हैं और इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि आपराधिक मुकदमा लंबित होने के बावजूद ऐसी नियुक्तियां कैसे उचित थीं।
याचिका में बताया गया है कि सीबीआई केस में सरकार से मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद भी रतीश अपने पदों पर बने हुए हैं। यह मामला केरल राज्य काजू विकास निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान काजू के आयात में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कंपनीज एक्ट के नियमों के उलट जरूरी विजिलेंस मंजूरी न होने के बावजूद 11 साल से ज्यादा समय तक पब्लिक सेक्टर कंपनियों में मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम किया है।
हाई कोर्ट की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भ्रष्टाचार के आरोपों और बार-बार अदालती दखल के बावजूद अलग-अलग सरकारों द्वारा रतीश को सार्वजनिक क्षेत्र के अहम पदों पर बनाए रखने को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं।
सीबीआई का यह मामला कथित तौर पर 600 करोड़ रुपए के काजू आयात घोटाले से जुड़ा है, जिसमें रतीश मुख्य आरोपी हैं।
सरकारी कंपनियों में अपने कार्यकाल के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के अन्य आरोप भी लगे हैं, फिर भी सरकार उन्हें वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपती रही है।
हाल की घटनाओं ने सरकार पर यह स्पष्ट करने का दबाव बढ़ा दिया है कि क्या केरल के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक में मुकदमे का सामना कर रहे अधिकारी को सार्वजनिक धन से जुड़े संवेदनशील पदों पर बने रहने दिया जा सकता है।
हाई कोर्ट के नाराजगी जाहिर करने और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगने के बाद रतीश की नियुक्तियों पर सरकार के रुख की अब बारीकी से न्यायिक समीक्षा होगी।
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Created On :   30 July 2026 7:31 PM IST











