1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ नरसंहार के लिए बांग्लादेश की न्याय की मांग का भारत ने क‍िया समर्थन

1971 के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ नरसंहार के लिए बांग्लादेश की न्याय की मांग का भारत ने क‍िया समर्थन
भारत ने 1971 में पाक‍िस्‍तान की ओर से बांग्लादेश के ख‍िलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ में क‍िए गए नरसंहार मामले में न्याय की मांग में बांग्लादेश का समर्थन क‍िया।

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने 1971 में पाक‍िस्‍तान की ओर से बांग्लादेश के ख‍िलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ में क‍िए गए नरसंहार मामले में न्याय की मांग में बांग्लादेश का समर्थन क‍िया।

नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि इस अभियान में लाखों बांग्लादेशियों की सुनियोजित और लक्षित हत्याएं की गईं। साथ ही महिलाओं के साथ व्यापक यौन हिंसा भी की गई।

उन्होंने कहा कि इस क्रूरता के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और लाखों बांग्लादेशियों को भारत में शरण लेनी पड़ी।

जायसवाल ने कहा, "हम सभी जानते हैं कि 1971 में पाकिस्तान की ओर से ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान भयानक अत्याचार किए गए थे। इस नरसंहार में लाखों बांग्लादेशी निर्दोष लोगों की सुनियोजित और लक्षित हत्या और महिलाओं के खिलाफ सामूहिक यौन हिंसा शामिल थी। इसने लाखों बांग्लादेशियों को उनके देश से पलायन करने के लिए मजबूर किया। वे भारत आए और शरणार्थी बने। कहने की जरूरत नहीं है कि इन क्रूरताओं ने पूरी दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। पाकिस्तान आज तक अपने अपराधों से इनकार करता है। हम न्याय की इस दिशा में बांग्लादेश का समर्थन करते हैं।”

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 25 मार्च 1971 की घटनाओं को “पूर्व-योजित नरसंहार” और देश के इतिहास के सबसे क्रूर अध्यायों में से एक बताया। बांग्लादेश ने बुधवार को इस दिन को जेनोसाइड-डे के रूप में मनाया, ताकि दमन में मारे गए लोगों को याद किया जा सके।

नरसंहार दिवस पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "25 मार्च, 1971 को 'नरसंहार दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मैं सभी शहीदों को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। स्वतंत्रता-प्रेमी बांग्लादेश के इतिहास में, 25 मार्च, 1971 सबसे शर्मनाक और क्रूर दिनों में से एक बना रहेगा।"

उन्होंने कहा कि उस रात पाकिस्तानी कब्जा करने वाली सेनाओं ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के तहत निहत्थे बांग्लादेशियों के खिलाफ इतिहास के सबसे "जघन्य" नरसंहारों में से एक को अंजाम दिया था। 1971 की कार्रवाई को एक पहले से तय नरसंहार बताते हुए, तारिक रहमान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने ढाका यूनिवर्सिटी, पिलखाना और राजारबाग पुलिस लाइन्स समेत कई जगहों पर शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और बेकसूर नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसके चलते कई लोगों की मौत हो गई।

इस बीच, द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए, जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि दोनों पक्षों से संवाद जारी है। भारत न केवल बांग्लादेश के साथ अपने बहुआयामी संबंधों को बनाए रखना चाहता है, बल्कि उन्हें और मजबूत और आगे बढ़ाना चाहता है।

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Created On :   27 March 2026 10:48 PM IST

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