भारत तेजी से एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा, वैश्विक स्तर पर शांति कायम करने में निभा सकता है बड़ी भूमिका ग्लोबल एक्सपर्ट्स
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत तेजी से एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक स्तर पर छवि विश्व शांति व्यवस्था को आकार देने वाले, आर्थिक स्थिरता और टेक्नोलॉजी को बढ़ाने वाले देश की बन रही है। यह बयान बुधवार को ग्लोबल एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया।
राष्ट्रीय राजधानी में इकोनॉमिस्ट एंटरप्राइज के 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के साइडलाइन के दौरान आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और एआई और उभरती टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया।
सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के ली कुआन यू स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में अर्थशास्त्र के ली का शिंग प्रोफेसर डैनी क्वाह ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद की बदलती प्रकृति और व्यापारिक गतिशीलता में आए बदलावों ने विश्व अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
क्वाह ने कहा कि व्यापारिक व्यवधानों से परे, एक गहरी चिंता वैश्विक विश्वास में कमी और बहुपक्षीय प्रणालियों का कमजोर होना है, जो पारंपरिक रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार रही हैं।
उन्होंने आईएएनएस को बताया,“भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है और अगर भारत कोशिश करे तो शांति कायम होगी। लोग शांति लाने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। मुझे लगता है कि लोग उचित नेतृत्व के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उचित नेतृत्व क्या होगा, यह तय करना अभी भारत पर निर्भर है।”
वहीं, लंदन के विज्ञान संग्रहालय के निदेशक इयान ब्लैचफोर्ड ने एआई के प्रति भारत के विशिष्ट और आशावादी दृष्टिकोण का जिक्र किया।
ब्लैचफोर्ड ने कहा, “अगर आप अमेरिका और यूरोप के सार्वजनिक सर्वेक्षणों को देखें, तो अधिकांश आबादी एआई को लेकर चिंतित है। भारत में स्थिति इसके विपरीत है। भारत एआई केंद्रों के लिए क्षमता निर्माण कर रहा है और साथ ही इसके प्रभावों पर गहराई से विचार भी कर रहा है।”
ब्लैचफोर्ड ने वैश्विक दक्षिण की व्यापक उपलब्धियों, विशेष रूप से भारत की विकास यात्रा की सराहना की।
ब्लैचफोर्ड ने आईएएनएस को बताया, “देश आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है, जबकि वह ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों से भी जूझ रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के विपरीत है, जिन्हें दशकों से समृद्धि का लाभ मिल रहा है।”
--आईएएनएस
एबीएस/
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Created On :   29 April 2026 4:05 PM IST












