कारगिल विजय दिवस सेना के पूर्व सैनिकों ने देश सेवा में किए गए बलिदान, साहस और गर्व को याद किया
चंडीगढ़, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कारगिल विजय दिवस के मौके पर, रविवार को सेना के पूर्व सैनिकों ने देश की सेवा के अपने अनुभवों को याद किया, सैन्य अभियानों के दौरान दिए गए बलिदानों को याद किया और वर्दी पहनने तथा देश की रक्षा करने पर गर्व महसूस किया।
सेना के पूर्व अधिकारी ज्योति शर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान लगी चोटों के बारे में बताया।
शर्मा ने कहा कि सेना में अपनी सेवा के दौरान, कश्मीर में एक ऑपरेशन में मेरे दोनों पैरों में गोली लग गई थी, जिसके कारण 14-15 सर्जरी करानी पड़ीं। आज, कारगिल विजय दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब एंड सिंध बैंक से स्कूटर पाकर हम गर्व महसूस कर रहे हैं और हम उन्हें दिल से धन्यवाद देते हैं।
उन्होंने बताया कि हम कुपवाड़ा में तैनात थे और एक ऑपरेशन के दौरान गश्त पर गए थे, तभी आतंकवादियों ने हम पर गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी में मैं घायल हो गया था, लेकिन भगवान की कृपा से मैं बच गया और अब अपने परिवार के साथ हूं। मुझे गर्व है कि मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला।
सेना के पूर्व मेजर वीवी नारायणन ने भारतीय सेना के मुख्य मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेना में हम मानते हैं कि देश की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण हमेशा सबसे पहले आता है, जबकि सैनिकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण दूसरे स्थान पर आता है।
पूर्व कर्नल उदय कुमार ने कहा कि कारगिल विजय दिवस उन सैनिकों की बहादुरी और बलिदान का सम्मान करने का दिन है जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में भारत को जीत दिलाई थी।
उन्होंने कहा, "आज कारगिल विजय दिवस है। यह वह दिन है जब हमने कारगिल युद्ध जीता था। 1999 में, पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल सेक्टर में रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था, लेकिन आखिरकार हमारी सशस्त्र सेनाओं ने उन्हें खदेड़ दिया। ऑपरेशन के दौरान कई बहादुर सैनिकों ने अपनी जान गंवाई, और हम उनकी याद में यह दिन मनाते हैं और उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देते हैं।"
देश कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत की याद दिलाता है। यह दिन उन 527 सैनिकों को सम्मान देता है जिन्होंने 'ऑपरेशन विजय' के दौरान अपनी जान गंवाई और उन हजारों सैनिकों के साहस और संकल्प को भी मान्यता देता है जिन्होंने दुनिया के सबसे मुश्किल युद्ध-क्षेत्रों में लड़ाई लड़ी।
मई और जुलाई 1999 के बीच हुई कारगिल की लड़ाई लद्दाख में कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और काकसर के पहाड़ी इलाकों में 5,000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर लड़ी गईं।
कड़ाके की ठंड, मुश्किल रास्तों और रणनीतिक चोटियों पर दुश्मन की मजबूत स्थिति के बावजूद, भारतीय सेना ने 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (एलओसी) को पार किए बिना पाकिस्तानी घुसपैठियों को सफलतापूर्वक खदेड़ दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी पेशेवर क्षमता और सैन्य संयम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
समय के साथ, यह जीत न केवल भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक बन गई है, बल्कि एक ऐसा अहम मोड़ भी साबित हुई है जिसने देश की रक्षा तैयारियों, रणनीतिक योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को नई दिशा दी।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   26 July 2026 3:13 PM IST












