हिजाब पहनने की आजादी होनी चाहिए, शिक्षा से इसका कोई संबंध नहीं पूर्व कांग्रेस मंत्री
बीदर, 15 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मंत्री पी. जी. आर. सिंध्या ने शुक्रवार को शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति देने का समर्थन करते हुए कहा कि हिजाब का शिक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता और इसे व्यक्तिगत आस्था एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए।
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के करीबी सहयोगी रहे सिंध्या ने स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब को लेकर चल रही बहस पर कहा कि यह देश का कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अन्य कपड़ों की तरह पहनावे का एक तरीका है।
उन्होंने कहा, “हिजाब निस्संदेह आस्था का विषय है। जैसे हम अलग-अलग तरह के कपड़े पहनते हैं, वैसे ही हिजाब भी एक प्रकार का पहनावा है। इसे पहनने या न पहनने में कुछ भी गलत नहीं है।”
सिंध्या ने कहा कि उनकी नजर में हिजाब पहनने का शिक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उन्होंने सवाल किया, “लोगों को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अगर कोई हिजाब पहनता है तो इसमें गलत क्या है? इसका शिक्षा व्यवस्था से क्या संबंध है?”
उन्होंने कहा कि यदि हिजाब किसी की आस्था का हिस्सा है तो उसे इसे स्वतंत्र रूप से पहनने की अनुमति मिलनी चाहिए।
इस बीच, कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “अंधभक्त” उनके हर फैसले से खुश रहते हैं।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में सुधाकर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि भी “खुशी की बात” है, क्योंकि पीएम मोदी के समर्थक हर फैसले का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा, “जब लोगों से कहा गया कि सोना मत खरीदो, तब भी उन्होंने समर्थन किया। जब कहा गया कि वाहन मत चलाओ, तब भी उन्होंने कहा कि यात्रा बंद कर देंगे। पीएम मोदी जो भी कहते हैं, उनके समर्थक उसे मानते हैं।”
सुधाकर ने दावा किया कि पीएम मोदी के समर्थक कहते हैं कि वह जनहितकारी शासन दे रहे हैं, इसलिए पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बावजूद वे खुश हैं।
गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने बुधवार को 5 फरवरी 2022 के स्कूल-कॉलेज यूनिफॉर्म आदेश को वापस लेते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ “सीमित पारंपरिक और आस्था आधारित प्रतीक” पहनने की अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद राज्य में नया विवाद खड़ा हो गया है।
वहीं, भगवा शॉल और सिर पर धार्मिक वस्त्र पहनने की अनुमति नहीं दिए जाने पर भाजपा की कर्नाटक इकाई ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर हिंदू परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों के प्रति असहिष्णुता दिखाने का आरोप लगाया है।
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Created On :   15 May 2026 8:31 PM IST












