राजा कृष्णामूर्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट नामांकन में मामूली अंतर से हारे

राजा कृष्णामूर्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट नामांकन में मामूली अंतर से हारे
अमेरिका के इलिनोइस में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट नामांकन की दौड़ में भारतीय मूल के नेता राजा कृष्णमूर्ति को करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और इलिनोइस की लेफ्टिनेंट गवर्नर जूलियाना स्ट्रैटन को विजेता घोषित किया गया।

न्यूयॉर्क, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के इलिनोइस में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट नामांकन की दौड़ में भारतीय मूल के नेता राजा कृष्णमूर्ति को करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और इलिनोइस की लेफ्टिनेंट गवर्नर जूलियाना स्ट्रैटन को विजेता घोषित किया गया।

इलिनोइस के स्थानीय समयानुसार रात 10 बजे मतदान बंद होने के तीन घंटे बाद लगभग 85 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी थी और स्ट्रैटन राजा कृष्णमूर्ति से लगभग 6 प्रतिशत आगे थीं। स्ट्रैटन की तरह ही एक अन्य अफ्रीकी अमेरिकी महिला प्रतिनिधि रॉबिन केली डेमोक्रेट डिक डरबिन के उत्तराधिकारी पद के नामांकन की दौड़ में तीसरे स्थान पर रहीं।

डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव के विजेता का नवंबर में होने वाले आम चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार के खिलाफ जीत सुनिश्चित है। यह चुनाव उस राज्य में हो रहा है, जहां पूर्व डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता कमला हैरिस ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को 11 प्रतिशत से हराया था।

प्राइमरी चुनाव में हार के साथ कृष्णमूर्ति सीनेट में सेवा करने वाले दूसरे भारतीय अमेरिकी बनने की अपनी महत्वाकांक्षा में असफल रहे।

2017 से प्रतिनिधि सभा के सदस्य रहे कृष्णमूर्ति ने राज्य की डेमोक्रेटिक पार्टी की पसंदीदा उम्मीदवार स्ट्रैटन के खिलाफ भारी बजट के साथ एक आक्रामक अभियान चलाया। उन्हें राज्य के शक्तिशाली अरबपति गवर्नर जे.बी. प्रित्जकर और सीनेटर टैमी डकवर्थ का समर्थन प्राप्त था।

कुछ विश्लेषकों ने इस प्राथमिक चुनाव को कृष्णमूर्ति और प्रित्ज़कर के बीच इच्छाशक्ति की लड़ाई के रूप में देखा, जो तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं और उन्होंने अपने भरोसेमंद सहयोगी स्ट्रैटन को कृष्णमूर्ति के खिलाफ खड़ा किया है।

हयात होटल साम्राज्य के उत्तराधिकारी प्रित्ज़कर ने कृष्णमूर्ति के समर्थन में अपनी निजी संपत्ति से 50 लाख डॉलर खर्च किए। विज्ञापन खर्च पर नजर रखने वाली एक कंपनी ने बताया कि कृष्णमूर्ति के समर्थन में विज्ञापनों पर लगभग 290 लाख डॉलर खर्च किए गए, जबकि स्ट्रैटन के लिए लगभग 160 लाख डॉलर खर्च किए गए।

जहां एक ओर स्ट्रैटन के लिए प्रित्ज़कर की उदारता चुनाव में एक मुद्दा बन गई, वहीं डिजिटल और क्रिप्टोकरेंसी हितों से समर्थित एक राजनीतिक कार्रवाई समिति, फेयरशेक द्वारा कृष्णमूर्ति को दिए गए समर्थन ने भी विवादों को जन्म दिया।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि फेयरशेक ने केली के समर्थन में विज्ञापनों पर पैसा खर्च किया, जिसे अफ्रीकी अमेरिकी वोटों को कृष्णमूर्ति के पक्ष में बांटने के प्रयास के रूप में देखा गया, भले ही कृष्णमूर्ति इस खर्च के प्रत्यक्ष लाभार्थी नहीं थे।

कृष्णामूर्ति को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड से लगभग 250,000 डॉलर भी मिले, जो इस समुदाय की एक राजनीतिक कार्रवाई समिति है।

कृष्णामूर्ति ने ट्रंप की नीतियों का विरोध करना अपने चुनाव अभियान का मुख्य मुद्दा बनाया था और हाल ही में उन्होंने ईरान से युद्ध का पुरजोर विरोध करते हुए अनाधिकृत बताया था। उन्होंने सीनेट में ट्रंप के ईरान युद्ध के खिलाफ एक प्रस्ताव में मतदान किया, जिसे दोनों दलों के सदस्यों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन वह पारित नहीं हो सका।

उन्होंने कल्याणकारी कार्यक्रमों के खिलाफ ट्रंप की कुछ कार्रवाइयों को रद्द करने के लिए विधायी कदमों का भी समर्थन किया है। ईरान संघर्ष के कारण पहले से ही ऊंची कीमतों में और वृद्धि होने के साथ, अर्थव्यवस्था और सामर्थ्य उनके प्रमुख लक्ष्यों में से थे।

नई दिल्ली में जन्मे कृष्णमूर्ति तीन महीने की आयु में अमेरिका आ गए थे। उनके पिता उच्च शिक्षा और अपने सपने को पूरा करने के लिए अपने परिवार को यहां ले आए थे।

कृष्णमूर्ति की आप्रवासी पृष्ठभूमि चुनाव के एक केंद्रीय मुद्दे से मेल खाती थी। ट्रंप की इमिग्रेशन संबंधी सख्ती, जिसके तहत उनका ऑपरेशन मिडवे ब्लिट्ज शिकागो की सड़कों तक पहुंचा और लगभग 1,600 लोगों की गिरफ्तारी हुई।

कृष्णमूर्ति ने एक चुनावी विज्ञापन में कहा था, "मैं खुद एक आप्रवासी हूं, इसलिए ट्रंप और सीमा शुल्क प्रवर्तन द्वारा हमारे समुदायों पर किए जा रहे हमलों को रोकना मेरे लिए बेहद व्यक्तिगत मुद्दा है।"

उन्होंने इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी के संचालन के ट्रंप-नियंत्रित स्वरूप को समाप्त करने और उसमें सुधार करने का आह्वान किया। स्ट्रैटन ने इसे पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की है।

बता दें कि कृष्णमूर्ति अपना कार्यकाल समाप्त होने पर सदन की अपनी सीट छोड़ देंगे, जिससे कांग्रेस में भारतीय अमेरिकियों के छह सदस्यीय तथाकथित "समोसा कॉकस" की सदस्यता कम हो जाएगी, जब तक कि नवंबर में नए सदस्य निर्वाचित नहीं हो जाते।

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Created On :   18 March 2026 10:39 AM IST

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