खाड़ी संघर्ष के बीच गहराया डीएपी संकट; खतरे में पाकिस्तान की कृषि सुरक्षा, यूरिया पर घरेलू उत्पादन से राहत

खाड़ी संघर्ष के बीच गहराया डीएपी संकट; खतरे में पाकिस्तान की कृषि सुरक्षा, यूरिया पर घरेलू उत्पादन से राहत
खाड़ी संघर्ष जारी रहने के साथ ही वैश्विक उर्वरक बाजारों में रुकावट ने फिर से पाकिस्तान की कृषि इनपुट सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर किया है।

नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। खाड़ी संघर्ष जारी रहने के साथ ही वैश्विक उर्वरक बाजारों में रुकावट ने फिर से पाकिस्तान की कृषि इनपुट सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर किया है।

'डॉन' अखबार के एक लेख के अनुसार, घरेलू उत्पादन क्षमता ने पाकिस्तान को यूरिया संकट के सबसे बुरे प्रभावों से बचा लिया है, लेकिन डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता। आयात पर निर्भरता कृषि अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाती है।

यूरिया के मामले में स्थानीय उत्पादन ने किसानों को खाद का इस्तेमाल कम करने से बचाया है, जिसका मतलब होता कम पैदावार और खाने-पीने की चीजों की ज्यादा कीमतें। डीएपी की स्थिति अलग है।

पाकिस्तान केवल 0.7 मिलियन टन डीएपी का वार्षिक उत्पादन करता है, जबकि जरूरत 2 मिलियन टन से अधिक है। इस अंतर को पूरा करने करने के ल‍िए मध्य पूर्व से आयात करना पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में यह निर्भरता संभालने लायक होती है, हालांकि महंगी पड़ती है। वर्तमान संकट में, यह एक गंभीर कमजोरी है।

यूरिया के विपरीत जहां घरेलू स्टॉक और उत्पादन निरंतरता एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, डीएपी के आयात सीधे मूल्य अस्थिरता और लॉजिस्टिक बाधाओं के प्रति संवेदनशील हैं। आपूर्ति में रुकावट, शिपिंग प्रतिबंध और कच्चे माल की कमी पहले ही वैश्विक उपलब्धता को सीमित कर रही है। लंबी अवधि की रुकावट से लागत में तेज वृद्धि हो सकती है। बोआई के समय उपलब्धता सीमित हो सकती है और किसानों को या तो आवेदन कम करना पड़ेगा या उपयुक्त पोषक तत्व मिश्रण बदलना होगा।

र‍िपोर्ट के अनुसार, कृषि पर इसके प्रभाव गंभीर हैं। डीएपी शुरुआती चरण के फसल विकास, विशेष रूप से मुख्य फसलों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका अपर्याप्त उपयोग यूरिया या अन्य पोषक तत्वों से आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता। बिना उत्पादन क्षमता को प्रभावित किए। इस दृष्टि से डीएपी की कमी केवल आपूर्ति की समस्या नहीं है। यह उत्पादन, किसानों की आय, मूल्य स्थिरता और अंततः खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

कम से कम मौजूदा डीएपी प्लांट को लगातार गैस आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा, नीति निर्माताओं को व्यापक प्रोत्साहन संरचना पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि उत्पादन क्षमता में विस्तार को बढ़ावा दिया जा सके और धीरे-धीरे आयात निर्भरता को कम किया जा सके।

र‍िपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी, देश की मजबूती और संवेदनशीलता के बीच का अंतर इस बात से निर्धारित होगा कि देश अपने यहां क्या उत्पादन कर सकता है और क्या नहीं।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   26 March 2026 9:46 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story