‘फांसी घर’ दिल्ली विधानसभा ने केजरीवाल, सिसोदिया को चेतावनी देते हुए पारित किया प्रस्ताव

‘फांसी घर’ दिल्ली विधानसभा ने केजरीवाल, सिसोदिया को चेतावनी देते हुए पारित किया प्रस्ताव
दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दो अन्य 'आप' नेताओं को 'फांसी घर' को लेकर झूठी और आधारहीन बातें फैलाने के लिए चेतावनी दी।

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दो अन्य 'आप' नेताओं को 'फांसी घर' को लेकर झूठी और आधारहीन बातें फैलाने के लिए चेतावनी दी।

इस चेतावनी को विधानसभा में रूल 77(1)(ए) के तहत प्रस्ताव पारित करके जारी किया गया। पूर्व अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपसभापति राखी बिरला को भी चेतावनी दी गई।

सभापति विजेंदर गुप्ता ने कहा कि विधानसभा में कठोर सजा देने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने इस मामले में न्यायिक संयम दिखाते हुए केवल औपचारिक चेतावनी जारी की ताकि विधानसभा की गरिमा बनी रहे।

उन्होंने बताया कि 'फांसी घर' का झूठा आरोप इस ऐतिहासिक भवन के इतिहास के लिए अपमानजनक है। यह भवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है और इसे किसी फांसी घर से जोड़ना सही नहीं है।

सभापति ने कहा कि यह भवन महात्मा गांधी द्वारा कभी देखी गई एकमात्र विधानसभा है। गांधी जी ने अपनी आत्मकथा 'द स्टोरी ऑफ माय एक्सपेरिमेंट विथ ट्रूथ' में बताया कि उन्होंने मार्च 1919 में यहां रोलेट बिल पर हुई बहस सुनी।

उन्होंने बताया कि रोलेट एक्ट इसी विधानसभा में 18 मार्च 1919 को पारित हुआ और इसके बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। 30 मार्च 1919 को चांदनी चौक में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी, जिसे गांधी जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की तैयारी बताया, इसी विधानसभा की बैठकों का परिणाम था।

सभापति ने यह भी याद दिलाया कि 1918 की युद्ध कॉन्फ्रेंस में 13 लाख भारतीयों को प्रथम विश्व युद्ध के लिए भर्ती किया गया और गांवों जैसे बावना, कंझावाला, अलीपुर, बादली, नजफगढ़ और मेहरौली के कई ग्रामीण युवाओं ने अपनी जान की कुर्बानियां दीं।

उन्होंने कहा कि फांसी घर को लेकर फैलाए गए झूठों पर समिति की तीसरी रिपोर्ट में विशेष रूप से प्रकाश डाला जाएगा।

विधानसभा सचिवालय और समिति सुनिश्चित करेगी कि झूठी जानकारी या अधिकारियों की अवहेलना से सदन की पवित्रता कभी भी प्रभावित न हो।

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Created On :   27 March 2026 7:55 PM IST

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