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बॉम्बे हाई कोर्ट: मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को किया खारिज, गैस चुराने का था आरोप

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। आरोप था कि कंपनी ने आंध्र प्रदेश के तट से दूर कृष्णा गोदावरी बेसिन में स्थित पड़ोसी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के कुओं से 1.55 अरब डॉलर से ज्यादा की प्राकृतिक गैस चुराई थी।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ के समक्ष जितेंद्र पी. मारू की दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में पीठ से अनुरोध किया गया था कि वह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और भारत सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दे। याचिका में दावा किया गया कि आरआईएल ने 2004 से 2013 के बीच कथित तौर पर एक बड़े पैमाने पर संगठित धोखाधड़ी की थी। कंपनी ने कृष्णा गोदावरी बेसिन में अपने अनुबंधित गहरे समुद्र वाले कुओं से तिरछी ड्रिलिंग करके पास के ओएनजीसी कुओं तक पहुंच बनाई और वहां से अवैध रूप से प्राकृतिक गैस निकाली। ओएनजीसी के अधिकारियों को 2013 में इस अवैध निकासी का पता चला और उन्होंने इसकी सूचना भारत सरकार को दी थी।
डी. गोलियर एंड मैकनॉटन (डी एंड एम) द्वारा की गई एक स्वतंत्र जांच में इस बात की पुष्टि हुई थी कि आरआईएल ने बिना अनुमति के ओएनजीसी के कुओं से गैस निकाली थी। इसके बाद ए. पी. शाह समिति ने चोरी की गई गैस की कीमत 1.55 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी थी, जिसमें 17.49 करोड़ डॉलर का जमा हुआ ब्याज भी शामिल था।
इससे पहले आरआईएल ने ओएनजीसी के साथ अपने विवाद में अपने पक्ष में एक मध्यस्थता फैसला हासिल कर लिया था, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने 14 फरवरी 2025 को अपने आदेश में भारत सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया और उस फैसले को रद्द कर दिया। पीठ ने यह निष्कर्ष निकाला कि वह फैसला सार्वजनिक नीति के खिलाफ था और इसलिए उसने रिलायंस के पक्ष में दिए गए आदेश को रद्द कर दिया।
याचिका में यह भी दावा किया गया था कि यह कथित साजिश मुंबई में रची गई थी, जिसके चलते सीबीआई को इस मामले की जांच करने का अधिकार क्षेत्र प्राप्त हो जाता है। याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि आरआईएल और उसके डायरेक्टरों के खिलाफ चोरी, बेईमानी से संपत्ति का दुरुपयोग करने और विश्वास तोड़ने के आरोप में एक आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
Created On :   27 March 2026 8:38 PM IST











