उठे सवाल: लोंढे बोले - राज्य में है जादू टोना की सरकार, बड़ोले ने कहा - 13 साल बाद भी जादू-टोना विरोधी कानून की नियमावली अधूरी

लोंढे बोले - राज्य में है जादू टोना की सरकार, बड़ोले ने कहा - 13 साल बाद भी जादू-टोना विरोधी कानून की नियमावली अधूरी
  • कानून लागू होता तो ऐसे मामलों पर लगती लगाम
  • कांग्रेस का पलटवार

Mumbai News. महाराष्ट्र में जादू-टोना विरोधी कानून 2013 में पारित होने के बावजूद अब तक उसकी नियमावली तैयार नहीं हो पाई है। इसी वजह से राज्य में अंधविश्वास और उससे जुड़े मामलों में बढ़ोतरी को लेकर अब सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा विधायक राजकुमार बडोले ने इस मुद्दे को उठाते हुए अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कानून बने 13 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो भाजपा सरकार और न ही महाविकास आघाड़ी सरकार इस पर ठोस काम कर सकी। उन्होंने मांग की कि अब जल्द से जल्द इस कानून की नियमावली तैयार की जाए ताकि अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। कांग्रेस ने भी मौजूदा सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

कानून लागू होता तो ऐसे मामलों पर लगती लगाम

बड़ोले ने कहा कि यदि यह कानून इस समय राज्य में लागू होता तो अशोक खरात जैसे मामलों को रोका जा सकता था। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की भी मांग की। बड़ोले ने कहा कि कुछ मामलों में सरकारों को निजी हित से ऊपर उठकर काम करने चाहिए। वैसे जादू टोना विधेयक कांग्रेस- राकांपा (अविभाजित) की सरकार के दौरान पारित हुआ था। ऐसे में इसे अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी अगली सरकार की थी। यहां तक कि साल 2019 में महाविकास आघाडी की सरकार ने भी इस पर कुछ नहीं किया।

कांग्रेस का पलटवार

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब महाविकास आघाड़ी सरकार सत्ता में आई, उस समय अधिकांश समय कोरोना महामारी से निपटने में चला गया। लोंढे ने आरोप लगाया कि उसके बाद बनी सरकार ने जानबूझकर इस विधेयक को लागू नहीं होने दिया। क्योंकि राज्य में जादू टोना की ही सरकार आ गई थी। उन्होंने इस मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जिम्मेदार ठहराया है।

अंधविश्वास के मामलों पर बढ़ती चिंता

राज्य में लगातार सामने आ रहे जादू-टोना और अंधविश्वास से जुड़े मामलों को देखते हुए अब इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसको लेकर स्पष्ट नियमावली बनने से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई संभव हो सकेगी और लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी।

Created On :   27 March 2026 9:27 PM IST

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