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बड़ी पहल: बच्चों में गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करने महाराष्ट्र के डॉक्टरों ने उठाया महत्वपूर्ण कदम, 10 प्रमुख बिंदुओं का कार्य-एजेंडा किया तय

Mumbai News. बच्चों में गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करने के लिए UNICEF के सहियोग से महाराष्ट्र के डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिसके तहत बच्चों के प्रारंभिक जीवन में पोषण, वृद्धि और विकास की चुनौतियों को किस तरह दूर किया जा सके। राजधानी में इस गंभीर विषय पर एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय परामर्श चर्चा आयोजित हुई। जो महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक (डीएमईआर) स्वास्थ्य विभाग इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कैम्हार्ड यूके और यूनिसेफ (UNICEF) के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुई। इसका उद्घाटन आईएपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने किया। इस दौरान विषय विशेषज्ञ, डॉक्टर, नीति-निर्माता और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मिलकर बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
जानेमाने पीडियाट्रिक्स और वरिष्ठ मार्गदर्शक डॉ उदय बोधनकर ने बताया कि इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य तैयार किया गया है। जिसके तहत “महाराष्ट्र घोषणा पत्र” तैयार किया गया, जिसमें बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए 10 प्रमुख बिंदुओं का कार्य-एजेंडा तय किया गया है। इसमें बच्चे के जन्म से पहले और जीवन के पहले एक हजार दिनों के साथ अगले एक हजार दिनों (लगभग 5 वर्ष तक) को बेहद अहम माना गया है।
इसके अलावा बच्चों के लिए संतुलित आहार, प्री-स्कूल शिक्षा, खेल-आधारित सीखने, शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद पर जोर दिया गया। साथ ही छोटे बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने की जरूरत भी बताई गई।
इसके अलावा बैठक में यह भी तय किया गया कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, विकास की निगरानी और किसी भी समस्या की शुरुआती पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभिभावकों को जागरूक बनाना और किशोरियों के पोषण में सुधार भी इस योजना का अहम हिस्सा है।
यहां UNICEF की भूमिका भी खास रही, जो दुनिया भर में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के लिए काम करता है। UNICEF तकनीकी सहयोग, जागरूकता और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
राज्य स्तर पर महत्व
यह पूरे महाराष्ट्र के लिए बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ी है। माना जा रहा है कि यदि इस घोषणा पत्र के बिंदुओं को सही तरीके से लागू किया जाए, तो कुपोषण कम होगा, बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा और राज्य का भविष्य मजबूत बनेगा।
क्या हैं यह 10 प्रमुख बिन्दु
1. पहले और अगले 1000 दिन क्या हैं?
- बच्चे के जन्म से पहले (गर्भावस्था) और जन्म के बाद पहले 2 साल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं—इन्हें “पहले 1000 दिन” कहते हैं। इसके बाद 2 से 5 साल की उम्र भी उतनी ही जरूरी है (अगले 1000 दिन)।
- मतलब: 0 से 5 साल तक का समय बच्चे के पूरे विकास की नींव है, इसलिए इस उम्र पर खास ध्यान देना चाहिए।
2. प्री-स्कूल पोषण मजबूत करना
- छोटे बच्चों को सिर्फ पेट भर खाना नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक खाना देना जरूरी है।
- जैसे: दाल, सब्जी, फल, दूध
- इससे कुपोषण, कमजोरी और मोटापा—तीनों से बचाव होता है।
3. स्कूल के लिए तैयारी (Early Learning)
- बच्चों को शुरू से ही खेल-खेल में सिखाना चाहिए।
- जैसे: बोलना, सुनना, रंग पहचानना, छोटी-छोटी गतिविधियां
- इससे बच्चा स्कूल जाने के लिए तैयार होता है और जल्दी सीखता है।
4. स्वस्थ जीवनशैली और खेलकूद
- 2–5 साल के बच्चों को रोज खेलना, दौड़ना और बाहर समय बिताना चाहिए।
- साथ में पूरी नींद भी जरूरी है
- कम बैठना (मोबाइल/टीवी) और ज्यादा एक्टिव रहना अच्छा है
5. स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) कम करें
- छोटे बच्चों को ज्यादा मोबाइल या टीवी देखने की आदत नहीं डालनी चाहिए।
- इससे आंखों, दिमाग और व्यवहार पर असर पड़ता है
- माता-पिता को इसके बारे में जागरूक होना जरूरी है
6. बच्चों की नियमित जांच (Monitoring)
- बच्चों की लंबाई, वजन और विकास की नियमित जांच होनी चाहिए।
- आंगनवाड़ी, डॉक्टर और स्वास्थ्य केंद्र इसमें मदद करते हैं
- इससे समय पर समस्या पकड़ में आ जाती है
7. समस्या की जल्दी पहचान
- अगर बच्चे को बोलने, चलने या समझने में देर हो रही है, तो जल्दी पहचान जरूरी है।
- जैसे: ऑटिज़्म, बोलने की दिक्कत, व्यवहार समस्या
- जल्दी इलाज से बच्चा बेहतर हो सकता है
8. माता-पिता को जागरूक बनाना
- बच्चे की देखभाल सिर्फ डॉक्टर नहीं, माता-पिता भी करते हैं
- सही खाना, प्यार, सिखाना—सब जरूरी है
- इसलिए उन्हें सही जानकारी देना जरूरी है
9. किशोरियों का पोषण सुधारना
- लड़कियों का स्वास्थ्य अच्छा होगा, तभी वे आगे चलकर स्वस्थ मां बनेंगी।
- खून की कमी (एनीमिया) दूर करना जरूरी है
- सही पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा देना जरूरी है
10. सभी विभाग मिलकर काम करें
- बच्चों का विकास सिर्फ एक विभाग से नहीं होता।
- स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास—सबको मिलकर काम करना होगा
- तभी सही परिणाम मिलेंगे
Created On :   27 March 2026 7:21 PM IST









