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व्यथा: महाराजबाग को मगरमच्छ का इंतजार, लगातार कम हो रहे वन्यजीव सफेद बाघ भी नहीं आएगा

Nagpur News. कभी वन्यजीवों से भरा रहने वाला महाराजबाग जू अब वन्यजीवों की कमी से जूझते दिख रहा है। इससे परिसर में खाली पिंजरों की संख्या देखी जा रही है। करीब आधा दर्जन पिंजरे खाली हैं, जो यहां आने वाले सैलानियों को खल रहे हैं। बंदरों से लेकर मगरमच्छ के पिंजरों में खामोशी छाई हुई है। शेर तो वर्ष 2004 के बाद से वापस नहीं आ सका है।
खाली दिखाई देते हैं पिंजरे
नागपुर जिले के लिए महत्वपूर्ण महाराजबाग में गार्डन के साथ जू भी है। यहां कभी शेर को भी रखा गया था। वर्तमान स्थिति में बाघ-बाघिन, तेंदुआ, भालू यहां मौजूद हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रजाति के पक्षियों के साथ कछुआ, मोर, लोमड़ी, काला हिरण, नीलगाय, चौसिंघा. उदबिलाव को यहां रखा गया है, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। खासकर यहां आने वाले सैलानियों को यहां एक ही बाघिन देखने को मिल रही है। बाघ को रखा है, लेकिन इसे डिस्प्ले पिंजरे में नहीं रखा है। इसके अलावा बंदरों के पिंजरे भी खाली हैं। मगरमच्छ नहीं हैं। पक्षियों की संख्या बहुत कम हो गई है। ऐसे में सैलानियों को यहां आने पर पिंजरे खाली दिखाई देते हैं।
बाघिन को रखना जरूरी
वन विभाग के गोरेवाड़ा में जब वन्यजीवों को रखने के लिए जगह का अभाव था, तो यहां आने वाले वन्यजीवों को इलाज के बाद महाराजबाग ही भेजा जाता था, लेकिन अब गोरेवाड़ा में संसाधनों के साथ जगह उपलब्ध रहने से यहां से बाघ की मांग करने के बाद भी बाघ को नहीं भेजा जा रहा है। नागपुर के महाराजबाग में दिशा-निर्देशानुसार बाघिन के साथ बाघ को रखना जरूरी है। बावजूद इसके वन विभाग की ओर से बाघ की जरूरत को पूरा नहीं किया जा रहा है।
अधिकारियों ने की थी पुष्टि
कुछ समय पहले तक महाराजबाग में सफेद बाघ आने की चर्चा थी। अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि जल्द ही यहां सैलानियों को सफेद बाघ देखने को मिलेगा, लेकिन आज तक यह बाघ चिड़ियाघर में पहुंच नहीं सका है। अभी अधिकारियों ने बताया कि जिस बाघ को यहां लाने वाले थे, वह बाघ अन्य बाघों के हमले में जख्मी हो जाने से उसे अब महाराजबाग नहीं लाया जा सकता है। इससे सफेद बाघ की उम्मीद भी टूट गई है।
प्रपोजल ड्राप
सुनिल बावस्कर, जू प्रभारी, महाराजबाग के मुताबिक अभी चिड़ियाघर में पर्याप्त वन्यजीव हैं। शेर अभी यहां लाने की अनुमति नहीं है। सफेद बाघ का प्रपोजल ड्राप हो गया है। रही बात मगरमच्छ की, तो इसके लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं।
Created On :   27 March 2026 7:33 PM IST









