Nagpur News: छह माह में पूरा नहीं होगा पुराने हाईकोर्ट भवन का संरक्षण कार्य, अदालत में शपथ पत्र एएसआई ने जताई कठिनाई

छह माह में पूरा नहीं होगा पुराने हाईकोर्ट भवन का संरक्षण कार्य, अदालत में शपथ पत्र एएसआई ने जताई कठिनाई
  • पुराने हाईकोर्ट परिसर में अब भी पार्किंग जारी
  • 30 मार्च को अगली सुनवाई

Nagpur News. शहर के पुराने हाईकोर्ट भवन के संरक्षण कार्य को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने (एएसआई) ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में शपथपत्र दाखिल कर बताया है कि ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण एक धीमी, लेकिन सतत प्रक्रिया है, जिस पर बजटीय सीमाओं का भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित छह माह की अवधि के भीतर संपूर्ण कार्य पूरा करना संभव नहीं है। एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कार्यों के लिए पहले ही कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाएगा। साथ ही, संशोधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को मंजूरी के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक को भेजने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

6 महीने में कार्य पूरा करें

पुरानी हाईकोर्ट की ऐतिहासिक विरासत इमारत की खराब स्थिति पर नागपुर खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर की जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका पर बुधवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में अदालत ने यह निर्देश दिया था कि इमारत के मरम्मत कार्य की प्रगति पर नजर रखने के लिए इस मामले को हर सोमवार अदालत के समक्ष लिया जाएगा। साथ ही पुरातत्व विभाग को निर्देश दिया गया था कि वह 6 महीने के भीतर मरम्मत का कार्य पूरा करे और इसके लिए अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली का विस्तृत शपथ पत्र अदालत में प्रस्तुत करे।

पुराने हाईकोर्ट परिसर में अब भी पार्किंग जारी

एएसआई के शपथ पत्र के अनुसार अदालत के पुराने निर्देशों के तहत, वकीलों को नए जिला अदालत इमारत के निर्माण तक यहां पार्किंग की अनुमति दी गई थी। एएसआई का कहना है कि जिला न्यायालय में मल्टी-लेवल पार्किंग बनने के बावजूद अभी भी इस संरक्षित स्मारक परिसर का उपयोग वाहनों की पार्किंग के लिए किया जा रहा है।

30 मार्च को अगली सुनवाई : बुधवार को सुनवाई के दौरान एएसआई ने शपथपत्र दाखिल कर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने में असमर्थता जताई। विभाग ने बताया कि संशोधित डीपीआर तैयार कर लिया गया है तथा लागत का अनुमान तैयार करने का कार्य प्रगति पर है, जिसे 30 मार्च तक या उससे पूर्व महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अनुमोदन हेतु भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दो माह के भीतर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। अदालत ने मामले पर 30 मार्च को अगली सुनवाई रखी है। न्यायालय मित्र के रूप में एड. आशुतोष धर्माधिकारी ने सहायता की, केंद्र सरकार की ओर से एड. मुग्धा चांदूरकर ने पक्ष रखा।


Created On :   27 March 2026 6:35 PM IST

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