शासनादेश: दिव्यांग निधि स्थापित कर सरकार ने जमा किए 20 करोड़, 2011 तक के आवासीय अतिक्रमण नियमित, ई-केवाईसी न कराने वाले नहीं निकाल सकेंगे वेतन

दिव्यांग निधि स्थापित कर सरकार ने जमा किए 20 करोड़, 2011 तक के आवासीय अतिक्रमण नियमित, ई-केवाईसी न कराने वाले नहीं निकाल सकेंगे वेतन
  • प्रदेश के दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग का शासनादेश जारी
  • ई-केवाईसी न कराने वाले सरकारी कर्मी मई महीने में नहीं निकाल सकेंगे वेतन
  • 2011 तक के आवासीय अतिक्रमण होंगे नियमित, 500 वर्ग फुट तक पूरी तरह मुफ्त

Mumbai News. प्रदेश सरकार ने महाराष्ट्र राज्य दिव्यांग निधि स्थापित करने को मंजूरी प्रदान की है। राज्य सरकार ने राज्य दिव्यांग निधि में पूंजी निवेश के रूप में 20 करोड़ रुपए उपलब्ध कराया है। दिव्यांगों के कल्याण, पुनर्वसन और सशक्तिकरण कार्यक्रम और सरकारी, विभिन्न महामंडलों व स्थानीय निकायों की योजनाओं को लागू करने के लिए राशि कम पड़ने पर राज्य दिव्यांग निधि का इस्तेमाल किया जा सकेगा। राज्य के दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग ने इस बारे में शासनादेश जारी किया है। दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 की धारा-88 के अनुसार राज्य दिव्यांग निधि (कोष) स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। इससे दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के पास प्राप्त होने वाला अनुदान, उपहार, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि, दान, समेत अन्य स्त्रोतों से प्राप्त होने वाली सभी राशि राज्य दिव्यांग निधि का हिस्सा मानी जाएगी। राज्य दिव्यांग निधि के प्रबंधन के लिए दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे की अध्यक्षता में नियामक मंडल का गठन किया गया है। इस नियामक मंडल की प्रत्येक आर्थिक वर्ष में कम से कम एक बार बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा। राज्य में कुष्ठरोग मुक्त, कम दृष्टि, मस्तिष्क पक्षाघात, नेत्रहीन समेत विभिन्न 21 प्रकार के दिव्यांगता होने पर दिव्यांगों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए विशिष्ट पहचान पत्र (यूडीआईडी) होना अनिवार्य है।

ई-केवाईसी न कराने वाले सरकारी कर्मी मई महीने में नहीं निकाल सकेंगे वेतन

प्रदेश में सेवार्थ प्रणाली के जरिए वेतन पाने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अप्रैल महीने के वेतन अदायगी से पहले ई-केवाईसी पूरा कराना होगा। ई-केवाईसी पूरा नहीं करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अप्रैल महीने का वेतन मई महीने में बैंक खाते से नहीं निकाल सकेंगे। शुक्रवार को प्रदेश के वित्त विभाग ने इस संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। ई-केवाईसी पूरा करके प्रत्येक कर्मियों को व्यक्तिगत जाकर आहरण एवं संवितरण अधिकारी के पास प्रमाणपत्र जमा करना होगा। सरकार का परिपत्र सभी जिला परिषद, मान्यता प्राप्त व अनुदानित गैरसरकारी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल, स्कूली शिक्षा विभाग (शालार्थ प्रणाली), महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, गैर कृषि विश्वविद्यालय और उससे संलग्न मान्यता प्राप्त व अनुदानित गैरसरकारी महाविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय व उससे संबधित मान्यता प्राप्त अनुदानित महाविद्यालय, संस्था, आदिवासी विकास विभाग के मान्यता प्राप्त व अनुदानित आश्रम स्कूल व संस्था, चिकित्सा विश्वविद्यालय समेत अन्य विभागों के शिक्षा संस्थानों के लिए लागू रहेगा। सरकार के मुताबिक सेवार्थ प्रणाली पर दी गई जानकारी के आधार पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित वेतन अदा किया जाता है। इसके लिए संबंधित कर्मियों को पैन क्रमांक और आधार नंबर का ब्यौरा देना पड़ता है। एक सरकारी कर्मी को दो बार वेतन न मिल सके। यह रोकने के लिए ई-केवाईसी व्यवस्था लागू की गई है।

2011 तक के आवासीय अतिक्रमण होंगे नियमित, 500 वर्ग फुट तक पूरी तरह मुफ्त

राज्य के राजस्व विभाग ने 1 जनवरी 2011 तक के केवल आवासीय अतिक्रमणों को नियमित करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर शुक्रवार को शासनादेश जारी किया गया। मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़कर यह आदेश पूरे राज्य में लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 500 वर्ग फुट तक के आवासीय अतिक्रमण पूरी तरह मुफ्त नियमित किए जाएंगे,जबकि इससे अधिक क्षेत्र के लिए बाजार मूल्य का केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, नदी, नाले, सड़क, जंगल, श्मशान, खेल मैदान और स्कूल या अस्पताल के लिए आरक्षित जमीनों पर किए गए अतिक्रमण किसी भी हालत में नियमित नहीं किए जाएंगे। ऐसे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वैकल्पिक घर उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य "सबके लिए घर और विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्य को हासिल करना है। इसके लिए जिला, उपविभाग और तहसील स्तर पर विशेष समितियां बनाई गई हैं, जो पूरी प्रक्रिया को लागू करेंगी और अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस योजना के तहत जमीन पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर दी जाएगी और अधिकतम 1500 वर्ग फुट तक ही अतिक्रमण नियमित किए जाएंगे। यदि घर का कुछ हिस्सा व्यवसाय के लिए उपयोग किया जा रहा है तो उस पर बाजार मूल्य का 25 प्रतिशत शुल्क देना होगा। साथ ही 1 जनवरी 2011 से पहले के निवास का प्रमाण जैसे वोटर लिस्ट, बिजली बिल या संपत्ति रसीद देना जरूरी होगा और पिछले एक साल का निवास प्रमाण भी अनिवार्य रहेगा।

राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के मुताबिक इस फैसले से राज्य के लाखों गरीब परिवारों को बड़ा दिलासा मिलेगा, उन्हें स्थायी आवास मिलेगा और उनके जीवन में स्थिरता आएगी। सरकार इस योजना की हर तीन महीने में समीक्षा करेगी।'



Created On :   27 March 2026 9:10 PM IST

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